
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने और ढांचों की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिये भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, प्राधिकरण ने अपने प्रोजेक्ट्स के तहत निर्मित प्रमुख पुलों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं के डिज़ाइन एवं रेखाचित्रों की स्वतंत्र जाँच के लिये एक नई और समान प्रणाली लागू की है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य निर्माण के प्रारम्भिक चरण में ही डिज़ाइन संबंधी कमियों की पहचान करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि सभी ढांचे भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों और तकनीकी विशिष्टताओं पर खरे उतरें। नई नीति के तहत चिन्हित प्रमुख संरचनाओं की स्वतंत्र जाँच की जिम्मेदारी सूचीबद्ध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs), सरकारी तकनीकी संस्थानों और पुल इंजीनियरिंग तथा जल विज्ञान में विशेषज्ञता रखने वाली अनुभवी फर्मों को सौंपी जाएगी।
नीति के दायरे में मुख्यतः बड़े और जटिल ढांचे शामिल हैं, जैसे 40 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले पुल, 3,000 घन मीटर प्रति सेकंड या उससे अधिक के डिज़ाइन जल प्रवाह वाले प्रमुख नदी पुल तथा वायडक्ट, तथा एनएचएआई द्वारा पहचाने गए अन्य विशेष या जटिल ढांचे। जाँच के दौरान संरचनात्मक डिज़ाइन, जल प्रवाह, बाढ़ स्तर, जल निकासी और नदी तल के कटाव से नींव की सुरक्षा का बारीकी से आकलन किया जाएगा।
ठेकेदार अनुबंध के तहत प्रस्तुत किए गए डिज़ाइन की समीक्षा के लिये तीन विशेषज्ञ संस्थाओं के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे, जिसमें से आवश्यकतानुसार एक या अधिक को चयनित किया जाएगा। चयनित संस्था डिज़ाइन की स्वतंत्र जाँच कर अपनी सिफ़ारिशें देगी; ठेकेदार इन सिफ़ारिशों के आधार पर डिज़ाइन में सुधार करेगा, जिसके बाद एनएचएआई उसे अंतिम मंजूरी देगा।
यह नई नीति दिसंबर 2026 से प्रभावी होगी और सभी नई EPC, हाइब्रिड एन्न्युटी मॉडल (HAM) और BOT परियोजनाओं पर लागू होगी। साथ ही, उन मौजूदा परियोजनाओं को भी इसके दायरे में रखा गया है जिनका डिज़ाइन सत्यापन अभी शुरू नहीं हुआ है। एनएचएआई के अनुसार, इस मजबूत गुणवत्ता‑आश्वासन तंत्र के माध्यम से देश भर में एक सुरक्षित और टिकाऊ राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा विकास को तेज़ी मिलेगी।
