Thursday, March 5खबर जो असर करे |
Shadow

लेख

होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

लेख
कैलाश चन्द्र भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है। वस्‍तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं। होलिका की वास्तविक कथा होलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य...
शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट

शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट

लेख
By: डॉ. अवधेश कुमार यादव शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट डॉ. अवधेश कुमार यादव केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के संघीय बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 1,39,289.48 करोड़ का अनुमानित प्रावधान किया गया है, जो विकसित भारत-2047 की मजबूत नींव रखने वाला कदम माना जा रहा है। यह राशि कुल बजट व्यय का लगभग 2.6 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 8.27 प्रतिशत अधिक है तथा शिक्षा मंत्रालय के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। हालांकि, यह धनराशि एनईपी-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य (शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत व्यय) से काफी कम है लेकिन वृद्धि मुद्रास्फीति से ऊपर होने के कारण एनईपी के क्रियान्वयन, विशेषकर अनुसंधान, नवाचार, स्किलिंग तथा शिक्षा-रोजगार संबंध स्थापित करने के क्षेत्रों में गति प्रदान करेगी। इस कुल आवंटन को शिक्षा मंत्रालय के दो प्...
अमेरिकी टैरिफ कटौती में भारत से ज्यादा अमेरिका का हित

अमेरिकी टैरिफ कटौती में भारत से ज्यादा अमेरिका का हित

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में कई बार फैसले तत्काल फायदे से अधिक दूरगामी मजबूरियों का नतीजा होते हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी ऐसा ही एक निर्णय है, जिसे सतही तौर पर भारत के पक्ष में बड़ी जीत माना जा रहा है, किंतु गहराई से देखने पर यह कदम अमेरिका के अपने घरेलू हितों, खासकर महंगाई से जूझते आम अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने की मजबूरी का परिणाम अधिक नजर आता है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत का धैर्य, संतुलित कूटनीति और दीर्घकालिक सोच आखिरकार रंग लाती दिखाई दी है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने टैरिफ को एक राजनीतिक और रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और यहां तक कि भारत जैसे मित्र देशो...
कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली

कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली

लेख
By: प्रयाग पाण्डे कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली प्रयाग पाण्डे हिमालय की गोद में बसा कुमाऊं अंचल न केवल अपने नैसर्गिक सौंदर्य, सुदीर्घ और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी विख्यात है, बल्कि यहां मनाई जाने वाली होली का भी अंदाज निराला है। यही वजह है कि कुमाउंनी होली की विशिष्ट पहचान है। अपना अनोखा रंग है। यहां की होली तन को ही नहीं रंगती, मन को भी उमंग से लबालब भर देती है। कुमाऊं की होली में आंचलिक विशिष्टता है। अनूठा सौंदर्य बोध है। रंग, राग और रागनियों का अदभुत समावेश है। ऋतुराज वसंत को यौवन का सूचक माना जाता है। वसंत ऋतु के आते ही समूची प्रकृति का यौवन एकाएक खिल उठता है। प्रकृति रंग -बिरंगी हो जाती है। विशिष्ट सुगंध और रंग लिए फूल खिलने लगते हैं। देश के अलग - अलग ्सों में लोग अपने -अपने अंदाज में वसंतोत्सव के रंग के आगोश में डूब जाते हैं। भारत के कोने -कोने में राग -रं...
सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

लेख
By: परिचय दास सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास परिचय दास वसंत की प्रथम आहट के साथ ही सहजन के पेड़ ने अपनी शाखाओं को नवजीवन के उजास से भर लिया। हल्की ठंडी हवा, धूप की धीमी परछाइयां और कोयल की आवाज के बीच सहजन के फूल अपनी नाज़ुक पंखुड़ियों को खोलने लगे। इन फूलों में एक अलौकिक सादगी थी, जैसे किसी गजल का पहला मिसरा-अनायास, लेकिन भीतर तक स्पंदित कर देने वाला। इन छोटे-छोटे सफेद फूलों की सुगंध में स्मृतियों का एक संसार बसता था। गांव की वह पगडंडी, जहां दुपहरिया की उनींदी हवा में सहजन की डालियां झूलती थीं। उनकी छांव में खेलते बच्चे, दोपहर की थकान से आंखें मूंदकर सुस्ताते किसान और किसी कोने में बैठी कोई स्त्री, जो फूलों को बटोर कर उनकी सब्ज़ी बनाने की सोच रही थी। सहजन का फूल केवल फूल नहीं था, यह किसी विरासत की तरह अगली पीढ़ी को सौंपा जाने वाला एक गीत था-मौन में गाया हुआ लेकिन दिल की गहराइयो...
आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट

मध्य प्रदेश, लेख
• डॉ. मोहन यादव भोपाल! भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता...
इतिहास का इतिहास

इतिहास का इतिहास

लेख
By: हृदयनारायण दीक्षित इतिहास का इतिहास - हृदयनारायण दीक्षित गाँधीजी जीवित होते तो आज 156 साल के होते। परसों उनकी पुण्यतिथि थी। वे बहुत गहराई से याद किए गए। उन्होंने विश्व इतिहास में हस्तक्षेप किया और काल की अखण्ड सत्ता को प्रभावित किया। काल है भी अखण्ड सत्ता। सारी घटनाएं समय के भीतर होती हैं। अथर्ववेद (19.53-54) में भृगु कहते हैं “काल-अश्व विश्व-रथ का संवाहक है। काल ही पिता है, वही आगे पुुत्र होता है। काल में प्राण हैं, मन हैं, सारे नाम हैं, काल की अनुकूलता ही आनंद है। काल स्वयंभू है। काल के द्वारा ही भूत और भविष्य पैदा हुए हैं आदि आदि।” समय पकड़ में नहीं आता। घटनाएं घटती हैं, घटना अतीत है। अतीत की घटनाओं का यथातथ्य संकलन इतिहास है। प्राचीन राष्ट्र की घटनाएं करोड़ों की संख्या में होती हैं। भारत ऐसा ही राष्ट्र है। मूलभूत प्रश्न है कि घटनाओं के संकलन में संकलनकर्ता की रूचि क्या है...
प्रतिभा पलायन के बीच ईयू ट्रेड डील का लाभ लेने को हम कितने तैयार हैं!

प्रतिभा पलायन के बीच ईयू ट्रेड डील का लाभ लेने को हम कितने तैयार हैं!

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को परिवर्तनकारी समझौता कहा है। वहीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से हर साल करीब 4 अरब यूरो (43 हजार करोड़ रुपये) के टैरिफ कम होंगे और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे। इस वक्‍त भारत और ईयू मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 फीसद और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई सा अपने पास रखते हैं। कहा जा रहा है कि यह समझौता व्यापार संबंधों में विविधता लाने और अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, इससे हर साल ड्यूटी में चार अरब यूरो की बचत होगी। अब ये बचत वास्‍तव में कितनी सच होगी ये आनेवाला वक्‍त बताएगा, किंतु आज बड़ा सवाल है कि हम चीन की तुलना में ईयू को अपना सामान बेचने के लिए कितने तैयार हैं। इसके लिए जो ...
संत रविदास ने दिया भगवान श्रीराम की भक्ति का संदेश

संत रविदास ने दिया भगवान श्रीराम की भक्ति का संदेश

लेख
By: डॉ. आनंद सिंह राणा "संत रविदास ने दिया भगवान श्रीराम की भक्ति का संदेश " -डॉ. आनंद सिंह राणा मध्ययुगीन भक्ति चेतना के प्रमुख संतों में संत रविदास जी का नाम श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल मात्र संत अथवा भक्तों के रूप में ही प्रतिष्ठित नहीं है, अपितु उनका व्यक्तित्व समाज सुधारक, क्रांतिकारी, चिंतक, उत्कृष्ट युग-पुरुष के रूप में अभिव्यक्त हुआ है। ऐसे महामानव के जीवन चरित्र ने वर्तमान समाज को एक नई ज्योति प्रदान की है। उनकी पूर्ण प्रामाणिक एवं सर्वप्रथम प्रकाशित वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में उपलब्ध होती है। संत रविदास जी का नाम विभिन्न ग्रंथों में अलग-अलग रूप में उपलब्ध होता है। उनके प्रचलित नामों में रविदास, रैदास रोहतास, रोहीदास, रामदास, रुईदास आदि उल्लेखनीय हैं। रामानंद संप्रदाय में मान्य ग्रंथ भक्तमाल में उन्हें रविदास के नाम से अभिहित किया गया है। वर्तमान समय में अन्...
समाज के लिए सर्वस्व समर्पण करने वाली बुधरी ताती

समाज के लिए सर्वस्व समर्पण करने वाली बुधरी ताती

लेख
By: प्रियंका कौशल बुधरी ताती, ये नाम शायद आपने पहले ना सुना हो। लेकिन दक्षिण बस्तर में बुधरी ताती महिला सशक्तिकरण का दूसरा नाम है। उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री देने की घोषणा की है। दक्षिण बस्तर यानि दंतेवाड़ा से अबूझमाड़ तक फैला धुर नक्सल प्रभावित इलाका। एक ऐसा इलाका जहां चप्पे-चप्पे पर मौत अपना शिकार ढूंढती थी। बारूद, गोली, एनकाउंटर, पुलिस-नक्सली संघर्ष वाले इस क्षेत्र में बुधरी ताती 80 के दशक से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की अलख जगा रही हैं। 1985 में 12 आदिवासी बच्चों के छात्रावास को प्रारंभ कर अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत करने वाली बुधरी ताती ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के छोटे से गांव हीरानार निवासी बुधरी ताती का जन्म 15 सितम्बर 1966 को हुआ। समाज सेवा का जुनून ऐसा कि 15 साल की उम्र से ही परिजनों की मनाही के बावजूद दूसरों की मदद करना श...