अमेरिका में एकबार फिर हिंदुत्व का जयघोष
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन भारतीय चिंतन की उस व्यापक दृष्टि को सामने लाता है, जिसमें विविधता के बीच मानवता की एकता को आधार माना गया है। ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ अंतरधार्मिक संवाद में भागवत ने धर्म, हिंदुत्व, सामाजिक समरसता, सेवा, राजनीति और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उनके संबोधन की खास बात यह रही कि उन्होंने हिंदुत्व को किसी समुदाय के विरोध अथवा बहिष्कार के विचार से अलग करते हुए मानव गरिमा और सभी पंथों के सम्मान से जोड़ने का प्रयास किया।
विविधता में एकता का भारतीय विचार
भागवत ने कहा कि दुनिया में धर्म और संस्कृतियां अनेक हैं। उनकी पूजा पद्धतियां, मान्यताएं और कर्मकांड अलग हो सकते हैं, मगर मनुष्य की मूल पहचान एक है। उन्होंने विविधता को समाप्त करने के बजाय उसे स्वीकार करने, उसका सम्म...









