रेप पीड़िता: सुप्रीम कोर्ट का आया निर्णय एक सबक, उनके लिए जो अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं!
डॉ. निवेदिता शर्मा
गाजियाबाद की चार वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को इलाज देने से इनकार करने वाले दो निजी अस्पतालों पर सर्वोच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणी ने सभी देशवासियों का अपनी ओर ध्यान खींचा है। पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस तंत्र, प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक संवेदनशीलता पर ऐसे मामले सामने आने पर गंभीर प्रश्न खड़े हो जाते हैं। मु
एक तरह से देखें तो मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिस स्पष्टता से कहा कि "यदि आपने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया तो अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखने का कोई अधिकार नहीं है," वह उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है जो अपने पेशे को केवल व्यवसाय समझ बैठे हैं या जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है, उससे जुड़ा वह कार्य जिम्मेदारीपूर्वक पूर्ण करना नहीं चाहते।
इस घटना में चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। परिजन उसे उपचार क...





