वैश्विक तनावों के बीच भारत की आर्थिक दृढ़ता
- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक व्यापार में सुस्ती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर पड़ती मांग के बीच यदि कोई देश अपेक्षाकृत आत्मविश्वास के साथ आज आगे बढ़ता दिखाई देता है, तो वह भारत है। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सामने आए जीएसटी संग्रह, विनिर्माण गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शा रहे हैं।
वस्तुत: मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यद्यपि शीर्ष स्तर पर यह वृद्धि केवल 3.2 प्रतिशत दिखाई देती है, किंतु रिफंड समायोजन के बाद वास्तविक राजस्व वृद्धि लगभग 9 से 10 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। यह बताता है कि अर्थव्यवस्था में उपभोग और कारोबारी गतिविधियों का आधार अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है।
वित्त वर्ष के श...









