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विशेष समाचार

Balbal: जहाँ प्रकृति की गोद में बसे हैं विश्वास, गर्मकुंड और प्राचीन धरोहरें

Balbal: जहाँ प्रकृति की गोद में बसे हैं विश्वास, गर्मकुंड और प्राचीन धरोहरें

विशेष समाचार
Balbal, 18 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। Balbal, जो चतरा और हजारीबाग जिलों की सीमा के नज़दीक स्थित है, अपनी प्राकृतिक गर्मकुंड, मां बागेश्वरी मंदिर, उत्तरवाहिनी महाने नदी और प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के घने जंगल, पहाड़ और नदियाँ झारखंड की समृद्ध प्रकृति, आस्था और इतिहास को समेटे हुए हैं। नवरात्र में मां बागेश्वरी के दर्शन के लिये श्रद्धालु दूर-दराज से इकट्ठा होते हैं, जबकि मकर संक्रांति पर दस दिन का विशाल पशु मेला ग्रामीण संस्कृति को जीवंत कर देता है। मां बागेश्वरी के दरबार में नवरात्र की रौनक विशेष है। मंदिर परिसर में भक्ति और पूजा के साथ-साथ शिवलिंग पर जल अर्पित कर शिव की पूजा भी की जाती है। यह स्थान गर्मकुंड के स्नान के साथ धर्म और प्रकृति का संगम प्रस्तुत करता है, जहाँ पानी में दाद, खाज व खुजली की समस्या में लाभ मिलने की मान्यता है। उत्तरवाहिनी महाने नदी ...
क्रांतिकारी लाला हरदयाल: अंग्रेजों के प्रलोभन ठुकराए, लंदन में किया असहयोग का आह्वान

क्रांतिकारी लाला हरदयाल: अंग्रेजों के प्रलोभन ठुकराए, लंदन में किया असहयोग का आह्वान

लेख, विशेष समाचार
रमेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी और विचारक लाला हरदयाल की गणना उन विरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में होती है, जिन्होंने भारत, अमेरिका और लंदन में अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध अभियान चलाया और राष्ट्र जागरण की अलख जगाई। लाला जी ने अंग्रेजों के हर प्रलोभन को ठुकराया। अंग्रेजों ने लंदन में उन्हें उस समय की सबसे प्रतिष्ठित आईसीएस सेवा में पद का प्रस्ताव भी दिया था, जिसे लाला जी ने ठुकरा दिया था। यही आईसीएस सेवा अब आईएएस के रूप में जानी जाती है। लाला हरदयाल का जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली में हुआ था। उनका घर दिल्ली के चाँदनी चौक में गुरुद्वारा शीशगंज के पीछे था। गुरुद्वारा शीशगंज उसी स्थल पर है, जहाँ औरंगजेब की कठोर यातनाओं के कारण गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान हुआ था। उनके पिता गौरीदयाल माथुर संस्कृत के विद्वान और कोर्ट में रीडर थे। माता भोली रानी रामचरितमानस क...
राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

नवाचार
सीवान, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अपनी जन्मभूमि, अपनी मिट्टी और भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव रहा है। वे जब 1950 में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचे, तब भी अपनी जड़ों और धार्मिक परंपराओं को नहीं भूले। इस लगाव का सबसे स्पष्ट प्रमाण उनकी दुर्गापूजा परंपरा है, जिसे वह हर साल जीरादेई में मनाते आएँ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे माँ-बाप की खेती‑किसानी और गाँव के सामाजिक जीवन में गहरी रुचि रखते थे। उनके परिवार में हर वर्ष शरद ऋतु में दुर्गा माता की पूजा का विशेष आयोजन होता था, जिसमें गाँव के सभी लोग भाग लेते थे। यह परंपरा उनके दिल में गहरी जड़ें जमा गई और बाद में जब वह स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने, तब भी उन्होंने इस परम्पर...
स्टारलिंक की बेचैनी और भारत की डिजिटल संप्रभुता

स्टारलिंक की बेचैनी और भारत की डिजिटल संप्रभुता

लेख, विशेष समाचार
अंतरिक्ष आधारित इंटरनेट अब दुनिया की तकनीकी और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। भारत जैसे विशाल बाजार में इसकी संभावनाएं और भी व्यापक हैं। यहां करोड़ों उपभोक्ताओं, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। ऐसे में एलन मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो, अमेजन लियो और भारती समूह से जुड़ी वनवेब के बीच प्रतिस्पर्धा का महत्व बढ़ जाता है।देसी उत्पाद खोजें अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह में भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में देरी को लेकर एलन मस्क की तीखी टिप्पणियों ने इस प्रतिस्पर्धा को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया। मस्क ने कुछ प्रभावशाली कारोबारी हितों पर स्टारलिंक के प्रवेश में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे भारतीय जनता के हितों के विरुद्ध बताया और बाद म...
मालवा में कहाँ गए पितरों के दूत? कौवों के विलुप्त होने की कहानी

मालवा में कहाँ गए पितरों के दूत? कौवों के विलुप्त होने की कहानी

लेख, विशेष समाचार
अशोक झलोया मंदसौर, नीमच, रतलाम सहित मालवा क्षेत्र में पितरों के दूत कहे जाने वाले कौवे इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध की थाली का भोग खाने के लिए भी मौजूद नहीं हैं। श्राद्ध पक्ष में यह विषय लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। कितनी भी आवाज लगाओ, कौवे नहीं आते। पहले गांव-गांव में आवाज लगाने पर घर के आंगन और छत पर श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने के लिए कौवों की भरमार होती थी। परिजन बड़ी उम्मीद से कौवों को बुलाते हैं, धार्मिक मान्यता है कि कौवे के माध्यम से ही पितरों तक श्रद्धा का भोजन पहुंचता है।अब श्राद्ध में भटकते हे लोगपितृपक्ष में पहले गाँव-गाँव में सुबह कांव-कांव से नींद खुलती थी। इस बार मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर-मालवा, उज्जैन में स्थिति यह है कि श्राद्ध का भोग लगाने के लिए कौवा ही नहीं मिल रहा। लोगों को मजबूरी में गाय और कुत्ते को भोग लगाना पड़ रहा है। यह केवल धार्मिक संकट नहीं, पर्यावरण ...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

लेख, विशेष समाचार
डॉ. मोहन यादव भोपाल! यशस्वी नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में ढाई दशक की गौरवपूर्ण यात्रा पर विशेष राजनीति के मैदान में ऐसे अनेक नेता और जननेता हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इनमें कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने गए, तो कुछ ने अपने राजनीतिक कौशल से अलग पहचान बनाई। लेकिन ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो संगठन से निकलकर मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकुशलता की मिसाल कायम करें और आगे चलकर प्रधानमंत्री के रूप में न केवल देश की राजनीति और शासन-व्यवस्था को नई दिशा दें, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाये। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंन...
हर पात्र परिवार तक उसका हक पहुंचाना हमारा संकल्प, राशन व्यवस्था को बना रहे डिजिटल और पारदर्शी : गोविंद सिंह राजपूत

हर पात्र परिवार तक उसका हक पहुंचाना हमारा संकल्प, राशन व्यवस्था को बना रहे डिजिटल और पारदर्शी : गोविंद सिंह राजपूत

मध्य प्रदेश, विशेष समाचार
भोपाल। मध्य प्रदेश में राशन की दुकान पर लाइन, कागजी प्रक्रिया और भुगतान की पारंपरिक व्यवस्था अब बदलने जा रही है। मध्य प्रदेश में राशन वितरण डिजिटल क्रांति की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के हितग्राहियों को अब उनके मोबाइल वॉलेट में मिलने वाले डिजिटल रुपये के टोकन के जरिए राशन उपलब्ध कराने की तैयारी है। भोपाल और इंदौर में शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली का पूरा मॉडल बदल सकता है। यह कहना है मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का है। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी काे दिए साक्षात्कार में उन्हाेंने वर्तमान में विभाग द्वारा किये जा रहे नवाचाराें और आगामी कार्ययाेजना पर विस्तृत चर्चा की है। प्रस्तुत है मंत्री राजपूत से बातचीत के मुख्य अंश........ सवाल : मध्यप्रदेश में राश...
गणेशोत्सव : प्रथम पूज्य गणपति में समाहित है बुद्धि, विवेक और मंगल का संदेश

गणेशोत्सव : प्रथम पूज्य गणपति में समाहित है बुद्धि, विवेक और मंगल का संदेश

लेख, विशेष समाचार
देशभर में गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 14 सितंबर से शुरू होने वाले इस महोत्सव की धूम 25 सितंबर तक रहेगी। लोग श्रद्धा-भक्ति के साथ भगवान गणेश का पूजन-अर्चन कर संपूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। वास्तव में विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, गणनायक, एकदंत, लंबोदर और गजानन जैसे अनेक नामों से पूजे जाने वाले भगवान गणेश भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में विशिष्ट स्थान रखते हैं। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में प्रथम पूज्य के रूप में गणपति का स्मरण करने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें बुद्धि, विवेक, विद्या और शुभारंभ का देवता माना गया है। यही कारण है कि विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, पूजा, व्यापार और शिक्षा जैसे मांगलिक कार्यों में सबसे पहले गणेश पूजन किया जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प...
नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम : जनभागीदारी, पुनर्वास और संकल्प से सामाजिक बदलाव

नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम : जनभागीदारी, पुनर्वास और संकल्प से सामाजिक बदलाव

विशेष समाचार
भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा को सही दिशा देना राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ी एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में नशामुक्त भारत अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति के माध्यम से नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास उपलब्ध कराकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशामुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक सहभागि...
अमेरिका में एकबार फिर हिंदुत्व का जयघोष

अमेरिका में एकबार फिर हिंदुत्व का जयघोष

लेख, विशेष समाचार
डॉ. मयंक चतुर्वेदी न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन भारतीय चिंतन की उस व्यापक दृष्टि को सामने लाता है, जिसमें विविधता के बीच मानवता की एकता को आधार माना गया है। ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ अंतरधार्मिक संवाद में भागवत ने धर्म, हिंदुत्व, सामाजिक समरसता, सेवा, राजनीति और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उनके संबोधन की खास बात यह रही कि उन्होंने हिंदुत्व को किसी समुदाय के विरोध अथवा बहिष्कार के विचार से अलग करते हुए मानव गरिमा और सभी पंथों के सम्मान से जोड़ने का प्रयास किया। विविधता में एकता का भारतीय विचार भागवत ने कहा कि दुनिया में धर्म और संस्कृतियां अनेक हैं। उनकी पूजा पद्धतियां, मान्यताएं और कर्मकांड अलग हो सकते हैं, मगर मनुष्य की मूल पहचान एक है। उन्होंने विविधता को समाप्त करने के बजाय उसे स्वीकार करने, उसका सम्म...