अबु धाबी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम यात्रा भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां लेकर आई है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच न सिर्फ आपसी रिश्तों की गर्मजोशी दिखी, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक समझौते भी हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत इस मुश्किल समय में अबू धाबी के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
यूएई को बताया ‘दूसरा घर’ और शानदार स्वागत पर जताया आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में हुए अपने शानदार स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दौरा उनके लिए अपने दूसरे घर आने जैसा है। पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपसे फोन पर बात करता रहता था, लेकिन व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए बहुत उत्सुक था। जैसा कि आपने कहा कि मैं अपने दूसरे घर आया हूं, यह भावना मेरे जीवन की एक बहुत बड़ी पूंजी है।”
उन्होंने अपने भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि जब वे यूएई पहुंचे, तो यूएई वायुसेना के विमानों द्वारा उन्हें जो एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) प्रदान किया गया, वह भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए गर्व की बात है। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा पर यूएई के नेतृत्व द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए भी उन्हें धन्यवाद दिया। कोरोना या अन्य मुश्किल समय में भारतीय प्रवासियों को ‘अपने परिवार के सदस्य’ की तरह रखने और उनकी देखभाल करने के लिए पीएम मोदी ने यूएई सरकार और शाही परिवार का हृदय से धन्यवाद किया। साथ ही, हाल ही में भारत में आई प्राकृतिक आपदा पर संवेदना व्यक्त करने के लिए भी आभार जताया।
पश्चिम एशिया में शांति और यूएई की सुरक्षा पर भारत का सख्त रुख
वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर पीएम मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए यूएई को हर संभव समर्थन का भरोसा दिया। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत किया। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उसके वैश्विक प्रभाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से मुद्दों को सुलझाने के लिए ‘संवाद और कूटनीति’ को महत्व देता है। पीएम मोदी ने कहा कि व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद अहम ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को स्वतंत्र और खुला रखना भारत की बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करना आवश्यक है। पीएम ने आश्वस्त किया कि भारत हर परिस्थिति में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
अहम समझौते और बड़े निवेश
इस दौरे का सबसे बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक परिणाम दोनों नेताओं की मौजूदगी में हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान रहा। इससे भारत को बड़े फायदे हुए हैं।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी: भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जो दोनों देशों के सैन्य और सुरक्षा संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा: ऊर्जा के क्षेत्र में ‘रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व’ और ‘लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस’ (LPG) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अहम एमओयू (MoU) साइन किए गए।
