Wednesday, July 22खबर जो असर करे |
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आर्थिक

Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान

Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन (Global Electronics Supply Chain) में चीन (China) का विकल्प बनने के लिए भारत (India) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही चिप पैकेजिंग (Chip Packaging) के वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरेगा। निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 फीसदी तक वित्तीय सहायता देगी। पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को यह सहायता 25 फीसदी तक होगी। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नई रणनीति से यूं आएगा बदलावनई रणनीति के तहत विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स ने भारत ...
ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका

ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका (America) अगस्त 2028 से विदेश से आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं (Generic medicines) पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) (Hefty Import Duties- Tariffs) लगाएगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका के भीतर कराना है। इस फैसले का असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। ट्रंप ने ट्रथु सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक टैरिफ शून्य फीसदी रहेगा। इसके बाद एक साल के लिए इसे 100 फीसदी कर दिया जाएगा। उसके बाद यह बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा। ट्रंप ने क्या कहा?अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका...
ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक, राष्ट्रीय
वॉशिंगटन। अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं। यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए "अंतिम नियम" के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था" की जगह लेगा। 15 सितंबर से लागू होगा नया नियमनए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका मे...
साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। देश के शेयर बाजार (Stock Market) से जुड़ी सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (Central Depository Services- CDSL) पर SEBI ने बड़ा एक्शन लिया है। सेबी (SEBI) ने कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना (A fine of ₹1 crore) लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए एक बड़े मैलवेयर (Malware) साइबर अटैक से जुड़ी सुरक्षा खामियों के कारण की गई है। उस समय इस साइबर हमले की वजह से CDSL की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई थीं और शेयर बाजार के सेटलमेंट (Settlement) में भी देरी हुई थी। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं। SEBI के आदेश के मुताबिक, CDSL अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने में कई स्तरों पर विफल रही। नियामक का कहना है कि अगर कंपनी ने समय रहते जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए होते, तो इस तरह का हमला टाला जा सकता था। इसी कारण सेबी ने 90 लाख रुपये का जुर्माना SEBI एक्...
US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर ट्रेड वॉर (Trade War) शुरू कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पड़ोसी देश कनाडा (Canada) से आयातित अधिकांश सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। अब ट्रंप के इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने से जुड़े तीन फैसलों को मंजूरी दी है। अमेरिका के ट्रेड एक्ट ऑफ 1930 की धारा 338 के तहत फैसला तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि चीन के अलावा कनाडा ही उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने ट्रंप द्वारा पहले...
IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अर्थशास्त्रियों की एक रिसर्च ने कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार, 2025 में लगाए गए व्यापक आयात शुल्क से विदेशी निर्यातकों ने अपनी कीमतों में अपेक्षित कटौती नहीं की। इसके बजाय अमेरिका में आयात का स्वरूप बदल गया और आयातक अपेक्षाकृत कम कीमत तथा कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर मुड़ गए। आईएमएफ के वर्किंग पेपर में कहा गया है कि टैरिफ का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को कीमतें घटाने के लिए मजबूर करना था, लेकिन व्यवहार में इसका असर सीमित रहा। विदेशी निर्यातकों ने कीमतों में नहीं की बड़ी कटौती रिसर्च के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद भी अधिकांश विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की मूल कीमतों में उल्लेखनीय कमी नहीं की। इसके चलते आयात शुल्क का बड़ा हिस्सा अमेरिकी आया...
Iran-America जंग का असर…. फिर बढ़ने लगी कच्चे तेल की कीमत….

Iran-America जंग का असर…. फिर बढ़ने लगी कच्चे तेल की कीमत….

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका (Iran-America War) में जंग और तेज होने की वजह से कच्चे तेल के दाम (Crude oil prices) एक महीने के हाई पर पहुंच गए हैं। अब यह तेजी से 100 डॉलर की ओर बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.8% तक बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी के केश्म द्वीप और ईरान के दक्षिणी शहरों जैसे शादेगान, सिरिक और हाजीआबाद पर हमले किए। अमेरिकी हमलों के बाद 20 जुलाई की सुबह ब्रेंट क्रूड 2.78 डॉलर चढ़कर 90.55 डॉलर प्रति बैरल पर ट्र्रेड कर रहा था। जबकि, WTI 2.39 डॉलर चढ़कर 84.46 डॉलर प्रति बैरल पर था। इससे पहले वाले युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जबकि WTI 119 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था। राहत की बात यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। सब...
ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा सैन्य टकराव (Military confrontation) अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Agreement) पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है। इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान?फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर...
लद्दाख में ओएनजीसी की बड़ी सफलता, दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पूरी; स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी रफ्तार

लद्दाख में ओएनजीसी की बड़ी सफलता, दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पूरी; स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी रफ्तार

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुगा घाटी में दूसरे जियोथर्मल (भू-तापीय) कुएं की सफलतापूर्वक खुदाई पूरी कर ली है। इस उपलब्धि के साथ भारत के पहले प्रायोगिक जियोथर्मल बिजली संयंत्र की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। एक महीने में पूरी हुई 1,000 मीटर गहरी खुदाई ओएनजीसी ने बताया कि उसकी अनुसंधान एवं विकास इकाई ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने समुद्र तल से करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पुगा घाटी में लगभग 1,000 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग का काम करीब एक महीने में पूरा किया। कंपनी के अनुसार यह अभियान पहले जियोथर्मल कुएं की तुलना में कम समय और कम लागत में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पहले कुएं से मिले थे उत्साहजनक संकेत यह दूसरा कुआं पहले जियोथर्मल कुएं की सफलता के आधार पर तैयार किया गया है। पहले कुएं से उबलते तापमान से अ...
‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के बावजूद भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भारत इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है.ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर इस सप्ताह हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. इस टर्मिनल का संचालन भारत द्वारा किया जाता है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे उनके नए सैन्य अभियान के तहत इस सप्ताह चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया था. चाबहा...