Sunday, September 6खबर जो असर करे |
Shadow

MP में कंप्यूटर खरीदी घोटाला…. टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, EOW ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच

भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी खरीद (Public Procurement) की ऑनलाइन प्रक्रिया GeM (Government e-Marketplace) पर सवाल खड़े उठाने वाला मामला सामने आया है. EOW को करीब 10.99 करोड़ रुपए की कंप्यूटर खरीदी की जांच में ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनसे टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर मिलीभगत की आशंका जताई गई है. जांच में टेंडर में शामिल चार कंपनियों के बीच कई ऐसी समानताएं सामने आईं, जो सामान्य तौर पर अलग-अलग प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच नहीं दिखतीं. EOW के मुताबिक, इन कंपनियों का संबंध एक ही व्यक्ति से पाया गया है।


EOW DG उपेंद्र जैन के अनुसार, जांच में चारों कंपनियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते में समानता मिली. इसके अलावा एक ही GST अकाउंट के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।


जैन का मानना है कि अलग-अलग कंपनियों के नाम से टेंडर में भाग लेकर वास्तविक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया गया हो सकता है. कंपनियों ने पात्रता साबित करने के लिए कंप्यूटर निर्माताओं के ऑथराइजेशन लेटर भी प्रस्तुत किए थे।


मामले की जांच में कंप्यूटरों की सप्लाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. EOW का दावा है कि कुछ पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई किए जाने के साक्ष्य मिले हैं. जांच में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें 22 जुलाई 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर 2024 के टेंडर में नया उपकरण बताया गया. यानी जिस कंप्यूटर की स्थापना पहले ही हो चुकी थी, उसे करीब दो महीने बाद हुए टेंडर में नए उपकरण के तौर पर पेश किए जाने का आरोप है।


स्पेसिफिकेशन भी बदले जाने का आरोप
जांच के दौरान सप्लाई किए गए कंप्यूटरों के तकनीकी मानकों की भी पड़ताल की गई. इसमें निर्धारित स्पेसिफिकेशन और वास्तविक उपकरणों के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई है. आरोप है कि कुछ कंप्यूटरों में स्थानीय स्तर पर खरीदे गए SSD और RAM लगाए गए, जो टेंडर में निर्धारित तकनीकी मानकों से मेल नहीं खाते थे।


मल्टीनेशनल कंपनी के नाम पर फर्जी ऑथराइजेशन
EOW जांच में एक और अहम बिंदु सामने आया. एक कंपनी ने टेंडर की पात्रता पूरी करने के लिए एक मल्टीनेशनल कंप्यूटर निर्माता कंपनी के नाम से कथित तौर पर ऑथराइजेशन लेटर जमा किया था. EOW के मुताबिक, इस दस्तावेज की सत्यता को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल सामने आए हैं।


UPS की कीमत ने भी चौंकाया
कंप्यूटरों के अलावा UPS की खरीद में भी कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. EOW के अनुसार, जिस UPS की प्रिंटेड कीमत 6,086 रुपए थी, उसे 11,247 रुपए में खरीदा गया। वहीं GeM पर उसी UPS की कीमत करीब 3,754 रुपए बताई गई थी. इतना ही नहीं, एक निर्माता ने EOW को बताया कि टेंडर में जिस मॉडल के UPS का उल्लेख था, उसकी सप्लाई ही नहीं की गई।


चार लोगों पर FIR, कंपनियों पर कार्रवाई की सिफारिश
जांच के आधार पर EOW ने मामले में चार लोगों के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है. साथ ही कथित अनियमितताओं से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की गई है। अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि 10.99 करोड़ रुपए की इस सरकारी खरीद में टेंडर प्रक्रिया किस तरह संचालित हुई, चार कंपनियों के बीच इतना गहरा कनेक्शन कैसे रहा और कथित तौर पर पुराने या अलग स्पेसिफिकेशन वाले उपकरणों की सप्लाई कैसे स्वीकार की गई?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *