Thursday, March 5खबर जो असर करे |
Shadow

यात्रा

गौरव गोगोई विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, बोलीं-परिवार और बच्चों को राजनीति में घसीटना गलत

गौरव गोगोई विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, बोलीं-परिवार और बच्चों को राजनीति में घसीटना गलत

यात्रा, राष्ट्रीय
गुवाहाटी। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई (Priyanka Gandhi Vadra) ने असम में चल रहे सियासी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी नेता के परिवार और बच्चों को निशाना बनाना “गलत राजनीति” है। गौरव गोगोई पर आरोपों को लेकर बयानअसम कांग्रेस अध्यक्ष Gaurav Gogoi पर लगाए गए कथित आरोपों के संदर्भ में प्रियंका गांधी ने कहा कि राजनीति में दो तरह के नेता होते हैं—एक जो सकारात्मक मुद्दों पर बात करते हैं और दूसरे जो समाज को ध्रुवीकृत करने की कोशिश करते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में राज्य में ध्रुवीकरण की राजनीति की जा रही है, जबकि जनता रोजगार, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहती है। “परिवार को निशाना बनाना ठीक नहीं” प्रियंका गांधी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक ने...
MP में बढ़ने वाले हैं वर्तमान और पूर्व MLAs के वेतन-भत्ते… सरकार ने कर ली पूरी तैयारी

MP में बढ़ने वाले हैं वर्तमान और पूर्व MLAs के वेतन-भत्ते… सरकार ने कर ली पूरी तैयारी

मध्य प्रदेश, यात्रा, राज्य
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विधायकों (MLAs) व पूर्व विधायकों (Former MLAs.) को जल्द ही बड़ी खुशखबरी मिल सकती है, क्योंकि राज्य सरकार ने राज्य के विधायकों के वेतन और भत्ते बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए सरकार ने पूरे 9 साल बाद एक कमेटी का गठन भी कर दिया है, जिसकी बैठक आगामी 11 नवंबर को होने वाली है। सरकार पूरे 9 साल के बाद विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने (Increasing Salaries and Allowances) की तैयारी में है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में विधायक वेतन-भत्ता संशोधन विधेयक ला सकती है, जिसके जरिए विधायकों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी समेत पूर्व विधायकों की पेंशन समेत अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस (Major opposition party Congress) ने सरकार की इस पहल का विरोध किया है। इस बारे में प्रतिक्रिया देते हु...
हारे का सहारा, खांटू श्याम का दीवाना : अकेले पैदल निकला 1500 किलोमीटर की यात्रा पर

हारे का सहारा, खांटू श्याम का दीवाना : अकेले पैदल निकला 1500 किलोमीटर की यात्रा पर

यात्रा
उमरिया, 13 अक्टूबर (हि.स.)। भक्ति जब सच्चे मन से की जाती है तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कहानी है खांटू श्याम जी के एक अनोखे भक्त की, जिसने अपने ईष्ट देव को हृदय में बसाकर अकेले ही 1500 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकलने का संकल्प लिया है। यह भक्त है छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के भद्रा पाली गांव का रहने वाला नितीश कुमार सिहार, उम्र मात्र 23 वर्ष। सोमवार को मप्र के उमरिया जिले से निकलते वक्‍त उनसे बातचीत में उन्‍होंने हिस से अपनी यात्रा के बारे में विस्‍तार से बताया है। नितीश बताते हैं कि वे पढ़ाई के साथ-साथ भक्ति में भी रुचि रखते हैं। लगभग 15 दिन पहले उनके मन में विचार आया कि “श्याम बाबा के दर्शन करने क्यों न पैदल जाया जाए?” बस, उसी क्षण उन्होंने बिना किसी तैयारी के अपने घर से निकलना तय किया और हाथ में श्याम बाबा का झंडा लेकर अकेले ही डेढ़ हजार किलोमीटर की इस कठिन यात्रा...
अंबिकापुर राजघराना: सरगुजा रियासत की संस्कृति, वीरता और जनसेवा का प्रतीक

अंबिकापुर राजघराना: सरगुजा रियासत की संस्कृति, वीरता और जनसेवा का प्रतीक

यात्रा, विशेष समाचार
अंबिकापुर, 12 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के उत्तर में स्थित सरगुजा जिला अपने गौरवशाली इतिहास और राजसी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। सरगुजा रियासत केवल एक शासन इकाई नहीं थी, बल्कि यह संस्कृति, साहस और प्रजा-सेवा की मिसाल मानी जाती है। यहां के शासक रघुवंशी वंश से संबंध रखते थे, जिन्हें भगवान श्रीराम का वंशज माना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि सरगुजा रियासत की स्थापना लगभग 1613 ईस्वी में हुई थी। प्रारंभिक शासकों में महाराज जयंतदेव और महाराज लक्ष्मणदेव का नाम उल्लेखनीय है। आने वाले वर्षों में यह रियासत छत्तीसगढ़ की प्रमुख और संगठित रियासतों में से एक बन गई। 20वीं सदी में सरगुजा का नाम महाराज रघुनाथ शरण सिंहदेव के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। वे दूरदर्शी, प्रजावत्सल और शिक्षा-प्रेमी शासक थे। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में तालाबों का निर्माण, विद्यालयों की स्थापना और कृषि सुधार पर वि...
कुदरगढ़ की पवित्र गाथा: जहां देवी दुर्गा ने किया था राक्षस कुदुर का वध, आज भी गूंजती है भक्ति की घंटियां

कुदरगढ़ की पवित्र गाथा: जहां देवी दुर्गा ने किया था राक्षस कुदुर का वध, आज भी गूंजती है भक्ति की घंटियां

यात्रा, विशेष समाचार
सूरजपुर, 12 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित कुदरगढ़ माता मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां देवी दुर्गा ने असुर कुदुर का अंत किया था, और तभी से यह पर्वतीय क्षेत्र भक्तों के लिए शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में “कुदुर” नामक राक्षस इस क्षेत्र में आतंक फैलाता था। देवी दुर्गा ने इसी स्थल पर उसका वध किया और उसी के नाम पर इस स्थान को “कुदरगढ़” कहा जाने लगा — अर्थात वह दुर्ग जहां कुदुर का अंत हुआ। राक्षस का संहार करने के बाद देवी यहीं विराजमान हो गईं, और तब से यह स्थान “मां कुदरगढ़” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। समुद्र तल से लगभग 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां कुदरगढ़ मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 1000 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। भक्तों का विश्वा...