नई दिल्ली। 8 जून को होने वाली विपक्षी इंडिया गठबंधन (Opposition INDIA Alliance) की बैठक से ठीक पहले गठबंधन के भीतर दरारें और गहरी हो गई हैं। द्रमुक (DMK) द्वारा इस बैठक का बहिष्कार करने के एलान के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। जहां एक तरफ जेएमएम झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा एकतरफा उम्मीदवार घोषित किए जाने से नाराज है, वहीं सीपीएम ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेताओं विशेषकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर किए गए तीखे हमलों को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है।
सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक बेहद सख्त लहजे में पत्र लिखा है। इस पत्र की प्रति इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों को भी भेजी गई है। उन्होंने लिखा, “केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व द्वारा एक सुनियोजित अभियान चलाया गया कि सीपीएम और बीजेपी के बीच गुप्त समझौता है। यहां तक कि हमारे वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री कॉमरेड पिनाराई विजयन पर भी पीएम मोदी के साथ डील करने का आरोप लगाया गया। जनसभाओं में यह सवाल उठाया गया कि अगर कोई डील नहीं है तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक उनसे पूछताछ या उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया?”
सीपीएम नेता ने आगे लिखा कि ये चुनावी सरगर्मी में दिए गए कोई छिटपुट बयान नहीं थे बल्कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खुद खरगे के पूरे राजनीतिक अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु थे।
क्या यह मोदी सरकार को न्योता देना था?
एमए बेबी ने सेक्युलरिज्म के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि केरल में आरएसएस-बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में सीपीएम के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल लगातार विजयन के खिलाफ ईडी की कार्रवाई की मांग कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया, “क्या इसे बीजेपी विरोधी रुख कहा जा सकता है या यह साथी विपक्षी नेता के खिलाफ अवैध दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मोदी सरकार को आमंत्रित करने का मामला है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मतभेदों के बावजूद सीपीएम संसद के भीतर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर एकजुट होकर लड़ाई लड़ती रहेगी।
झारखंड में JMM और कांग्रेस के बीच भी तकरार
उधर झारखंड में भी गठबंधन के सहयोगियों के बीच तालमेल गड़बड़ा गया है। कांग्रेस ने झारखंड की दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए खरगे के कार्यालय के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) प्रभारी प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जिससे जेएमएम काफी नाराज है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ जेएमएम राज्य की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त हैं। एक सीट जीतने के लिए न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं।
नाराजगी के बीच जेएमएम ने शनिवार को पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को एक सीट के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। वहीं दूसरी सीट को लेकर जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व कांग्रेस से चर्चा के बाद ही लेगा।
डीएमके के बहिष्कार का कारण
इससे पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने 8 जून की बैठक में शामिल न होने का फैसला कर गठबंधन को बड़ा झटका दिया था। डीएमके की नाराजगी इस बात को लेकर है कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में उससे नाता तोड़ लिया और हालिया विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके से हाथ मिला लिया। द्रमुक के इस कदम ने चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन के भविष्य पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
