भारतीय मजदूर संघ : 71 वर्षों की राष्ट्रनिष्ठ श्रमिक यात्रा, जिसने श्रम आंदोलन को दिया भारतीय दृष्टिकोण
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
23 जुलाई 1955 को स्थापित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) आज केवल देश का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन होने के नाते भारतीय श्रम दर्शन का सबसे सशक्त प्रतिनिधि है। वस्तुत: जब विश्व का श्रमिक आंदोलन पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच संघर्ष की धुरी पर घूम रहा था, तब राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना करते हुए श्रम आंदोलन को एक तीसरा मार्ग दिया, जिसके लिए कहा गया, "राष्ट्रहित, उद्योगहित और मजदूरहित" का मार्ग। यही कारण है कि सात दशक बाद भी आज बीएमएस राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की रचनात्मक भागीदारी का एक सशक्त मंच बनकर खड़ा है।
यहां ध्यान देने योग्य है कि भारतीय मजदूर संघ का जन्म ऐसे समय हुआ था, जब अधिकांश ट्रेड यूनियनें राजनीतिक दलों अथवा वैचारिक समूहों के प्रभाव में काम कर रही थीं। कहीं वर्ग संघर्ष की कम्युनिस्ट अवधारणा प्रमुख थी तो कहीं श्रमिक आंदोलन राजनीत...









