उज्जैन। प्रतिभा और लगन के दम पर मध्य प्रदेश के उज्जैन की एक छात्रा ने ऐसा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ा दिया है। उत्कृष्ट विद्यालय की कक्षा 12वीं की छात्रा एवं माइक्रो आर्टिस्ट दीक्षा कुशवाह ने मात्र 22 मिनट में चने की 12 दालों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की सूक्ष्म पेंटिंग बनाकर वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।
यह जानकारी गुरूवार को जनसंपर्क अधिकारी घनश्याम सिरसाम ने देते हुए बताया कि ऋषि नगर निवासी दीक्षा ने केवल 8 मिलीमीटर आकार की दालों पर अद्भुत बारीकी के साथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की आकृतियां उकेरीं। उनकी इस अनोखी कला ने न केवल कला प्रेमियों को प्रभावित किया, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाई। यह उपलब्धि उन्होंने शिप्रा फाइन आर्ट कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अभिषेक तोमर के मार्गदर्शन में हासिल की।
सूक्ष्म कला में दिखाया असाधारण कौशल
दीक्षा को माइक्रो आर्ट की प्रेरणा फ्रीगंज स्थित एक आर्ट क्लास से मिली, जहां अन्य विद्यार्थियों की कलाकृतियों को देखकर उनकी रुचि इस विधा की ओर बढ़ी। इसके बाद उन्होंने करीब एक वर्ष तक लगातार अभ्यास किया और आखिरकार एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसे हासिल करना आसान नहीं माना जाता।
बताया जाता है कि इतनी छोटी सतह पर आकृतियां उकेरने के लिए विशेष उपकरणों के साथ-साथ अत्यधिक धैर्य, एकाग्रता और हाथों की स्थिरता की आवश्यकता होती है। दीक्षा ने 13 अप्रैल को यह कलाकृति तैयार की थी, जिसे विश्व रिकॉर्ड के लिए अब मान्यता मिली।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
दीक्षा की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उज्जैन की प्रतिभाशाली बेटी ने 8 मिमी आकार की 12 दालों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की पेंटिंग बनाकर असाधारण कला का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने दीक्षा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह अपनी प्रतिभा से प्रदेश और देश का नाम आगे भी रोशन करती रहें।
तीर्थ दर्शन से मिली प्रेरणा
दीक्षा ने बताया कि उन्हें यह कलाकृति बनाने की प्रेरणा केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान मिली। साथ ही, अपने कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए विश्व रिकॉर्ड भी उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बने। सबसे छोटे आकार में ज्योतिर्लिंगों को चित्रित करने की इच्छा और निरंतर अभ्यास ने उन्हें इस उपलब्धि तक पहुंचाया।
दीक्षा की यह सफलता साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और रचनात्मक सोच के बल पर छोटी-सी शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुंचा सकती है।
