-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां वह वैश्विक नेतृत्व की क्षमता रखने वाली शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, विदेशी निर्भरता और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे आज पूरी दुनिया के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। भारत भी इनसे बाहर नहीं है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंद्रह सूत्र भारत को आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से मज़बूत, पर्यावरणीय रूप से संतुलित और रणनीतिक रूप से शक्तिशाली बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर कहा है कि “21वीं सदी भारत की सदी होगी”, किंतु बड़ा प्रश्न यही है कि यह संभव कैसे होगा? वस्तुत: यह तभी संभव है- जब भारत ऊर्जा, कृषि, उपभोग, परिवहन और जीवनशैली के स्तर पर आत्मनिर्भरता की ओर निर्णायक कदम बढ़ाए, इसलिए पीएम मोदी के आज के समय में दिए गए इन पंद्रह सूत्रों में स्वदेशी, सतत विकास, आर्थिक राष्ट्रवाद और सामूहिक जिम्मेदारी का गहरा संदेश छिपा हुआ है।
विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने का राष्ट्रीय अभियान
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इससे हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग, मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा, कार-पूलिंग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर देना अत्यंत दूरदर्शी कदम है। भारत में तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इस दिशा में बड़ा परिवर्तन ला रही है। नीति आयोग के अनुसार यदि भारत बड़े पैमाने पर ई-वाहनों को अपनाता है तो वर्ष 2030 तक अरबों डॉलर के तेल आयात को कम किया जा सकता है।
सार्वजनिक परिवहन
प्रधानमंत्री मोदी लगातार अपने भाषणों में रेलवे ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं। समझना होगा कि इसके पीछे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों कारण मौजूद हैं। सड़क परिवहन की तुलना में रेलवे कम ईंधन खर्च करता है और कार्बन उत्सर्जन भी कम करता है। भारत आज दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्कों में शामिल है और सरकार इसे ग्रीन ट्रांसपोर्ट में बदलने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।
दिल्ली, मुंबई, भोपाल, अहमदाबाद और अन्य शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि ऊर्जा बचत और प्रदूषण नियंत्रण का राष्ट्रीय मॉडल है। एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली मेट्रो हर वर्ष लाखों टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर रही है।जब नागरिक निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन अपनाते हैं, तब ट्रैफिक कम होने के साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी सुरक्षित रहता है।
वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल इंडिया
कोविड महामारी के दौरान भारत ने देखा कि डिजिटल तकनीक कैसे लाखों लोगों को घर बैठे कार्य करने में सक्षम बना सकती है। प्रधानमंत्री मोदी का वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग्स को प्रोत्साहन देना आधुनिक अर्थव्यवस्था की समझ को दर्शाता है।भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बन चुका है। यह परिवर्तन बताता है कि तकनीक सुविधा होने के साथ ही हम सभी के लिए आर्थिक शक्ति का माध्यम भी है।
स्वदेशी की नई परिभाषा यानी लोकल से ग्लोबल होना है
प्रधानमंत्री मोदी ने “वोकल फॉर लोकल” का जो मंत्र दिया, वह बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन का आधुनिक रूप है। जूते, बैग, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ और दैनिक उपयोग की सामग्री यदि भारत में बने उत्पादों से खरीदी जाएँ, तब इस स्थिति में घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलना स्वभाविक है।
आज भारत मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में विश्व के प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। एक समय भारत मोबाइल आयात करता था, लेकिन अब “मेड इन इंडिया” स्मार्टफोन दुनिया के अनेक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। प्रधानमंत्री मोदी कह भी रहे हैं, “लोकल उत्पाद खरीदना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का कार्य है।” वस्तुत: यह विचार भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की बुनियाद है।
विदेशी खर्चों पर नियंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गैर-जरूरी विदेश यात्राओं, विदेशी शादियों और विदेश में छुट्टियाँ मनाने से बचने की अपील सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा बचाने से जुड़ी हुई है। भारत हर वर्ष पर्यटन और विलासिता पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है।यदि यही धन भारत के भीतर खर्च हो, तो घरेलू पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय रोजगार को बड़ी मजबूती मिल सकती है। “देखो अपना देश” अभियान इसी सोच का हिस्सा है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक भारत के पास विश्वस्तरीय पर्यटन क्षमता मौजूद है।
सोने की खरीदारी और विदेशी मुद्रा
भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर वर्ष हजारों टन सोना आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील कि गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम की जाए, वास्तव में आर्थिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि यह सच है कि भारत में सोने को सामाजिक प्रतिष्ठा और निवेश दोनों के रूप में देखा जाता है, लेकिन यदि यही निवेश उत्पादन, स्टार्टअप, कृषि और उद्योगों में जाए, तो अर्थव्यवस्था को अधिक गति मिल सकती है।
खाद्य तेल और स्वास्थ्य
भारत अपनी खाद्य तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पाम ऑयल और अन्य खाद्य तेलों के आयात पर हर वर्ष भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खाने के तेल का उपयोग कम करने की अपील देखाजाए तो स्वास्थ्य संबंधी सलाह के साथ देश के हित में आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि है धरती को बचाने का अभियान
आज अपने सूत्र बिन्दुओं में प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग 50 प्रतिशत कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की है। भारत की मिट्टी लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कमजोर हो रही है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता पर गंभीर प्रभाव देखा गया है।
प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की सेहत सुधारती है, बल्कि उत्पादन लागत भी कम करती है। आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने और पर्यावरण संरक्षण दोनों में मदद मिल रही है।
गाँवों में ऊर्जा क्रांति
उनकी अपने किसानों से अपेक्षा यह भी है कि खेती में डीजल पंपों के स्थान पर सोलर पंपों का उपयोग होना चाहिए, इससे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा क्रांति लाना संभव है। डीजल महंगा होने के कारण किसानों की लागत बढ़ती है। वहीं सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप दीर्घकालीन समाधान प्रदान करते हैं।यदि गाँव ऊर्जा आत्मनिर्भर बनते हैं, तब यह तय है कि भारत की आर्थिक संरचना और अधिक मजबूत होगी।
यहां कहना यही होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ये पंद्रह सूत्र राष्ट्र निर्माण का जनआंदोलन हैं। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादन, कृषि सुधार और सामाजिक जिम्मेदारी का व्यापक दृष्टिकोण शामिल है।भारत यदि इन सिद्धांतों को जीवनशैली का हिस्सा बना लेता है, तो आने वाले वर्षों में वह आर्थिक महाशक्ति तो बनेगा ही, साथ ही वह नैतिक और रणनीतिक रूप से भी विश्व का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन सकता है।
