
भोपाल, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर‑भोपाल‑इन्दौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास को कैबिनेट में मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सात जिलों – इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास – में लगभग 10 हज़ार एकड़ भूमि पर 3‑5 औद्योगिक हब स्थापित किए जाएंगे। लक्ष्य है कि मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ निजी‑सार्वजनिक निवेश आकर्षित किया जाए और अगले तीन वर्षों में यह आंकड़ा ₹3 लाख करोड़ से ऊपर पहुँच जाए। इससे 6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष‑अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के “हर अंचल में निवेश, हर जिले में रोजगार” के संकल्प को साकार करने हेतु यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। कॉरिडोर के माध्यम से नरसिंहपुर‑रायसेन में आधुनिक फूड पार्क, एग्री‑प्रोसेसिंग क्लस्टर, वेयरहाउसिंग और कोल्ड‑चेन नेटवर्क स्थापित कर किसान‑उत्पाद का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण व मूल्यवृद्धि होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और किसानों को बेहतर कीमतें मिलेंगी, साथ ही ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा।
जबलपुर में भारी‑इंजीनियरिंग, रक्षा‑एयरोस्पेस और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय सूक्ष्म‑लघु‑मध्यम उद्यमों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा और तकनीकी‑गैर‑तकनीकी दोनों वर्गों के युवाओं को नई नौकरियां मिलेंगी। राजधानी भोपाल में सूचना‑प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, अनुसंधान एवं विकास के क्लस्टर स्थापित कर उच्च‑शिक्षित प्रतिभाओं को शहर में ही आकर्षित किया जाएगा।
सीहोर‑देवास क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण, वेयरहाउसिंग और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब बनेंगे, जिससे इंदौर को एक उन्नत मैन्युफैक्चरिंग एवं सेवा केंद्र के रूप में विस्तार मिलेगा। परियोजना के अंतर्गत औद्योगिक टाउनशिपों में आवासीय परिसरों के साथ अस्पताल, स्कूल, डे‑केयर, स्किल‑डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, खेलकूद क्षेत्र और हरे‑भरे स्थान भी तैयार किए जाएंगे।
निवेशकों के लिए प्लग‑एंड‑प्ले बुनियादी ढांचा, समतल भूमि, चौड़ी आंतरिक सड़कें, 24‑घंटे बिजली, औद्योगिक जल, सीवरेज, अपशिष्ट प्रबंधन और हाई‑स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। विकास के पहले चरण में ₹100 करोड़ की प्रारंभिक शेयर पूंजी और ₹20 करोड़ ब्याज‑मुक्त ऋण कंपनी को दिया जाएगा। जबलपुर‑भोपाल‑इन्दौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड को मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास अधिनियम, 2013 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के तहत वैधानिक शक्ति प्रदान की गई है, जिससे भूमि अधिग्रहण, जोनिंग और दीर्घकालिक पट्टे की प्रक्रिया तेज होगी। यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर के अन्य कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के समान सफलतापूर्ण माना गया है।
