
भोपाल, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में राज्य के औद्योगिक निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने हेतु जबलपुर‑इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के गठन को शत‑प्रतिशत सरकारी स्वामित्व के साथ अनुमोदित किया गया। साथ ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास को तेज़ करने के लिये लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिये राज्य द्वारा प्रारम्भिक रूप से 100 करोड़ रुपये की चुकता पूँजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के कार्य संचालन एवं नीतिगत निर्णयों के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी तथा उपयुक्त नामांकित उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय द्वारा सभी कार्य संचालित होंगे।
कंपनी को मध्य प्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013 के तहत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में मान्यता दी जाएगी तथा मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित आर्थिक हबों के लिये नोडल एजेंसी की शक्ति एवं दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी का मुख्य कार्य आर्थिक हबों के भीतर भूमि की पहचान, प्रबंधन, भू‑अर्जन, जोनिंग, मास्टर‑प्लानिंग, ले‑आउट, लीज/सब‑लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना का विकास होगा। मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके कार्यक्षेत्र में नहीं आएगा; फोकस केवल आर्थिक हबों के अंदरूनी एवं साझा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा।

विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क, फूड पार्क, एग्री‑प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसी साझा सुविधाओं का विकास होगा। इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिये PPP, EPC, कंसेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम व डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडल अपनाए जाएंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक अधिसूचनाएँ, शासनादेश एवं अन्य वैध दस्तावेज जारी करने का अधिकार दिया गया।
मंत्रिपरिषद ने जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 संधिपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन हेतु 241.88 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी, जिसमें प्रति विद्यार्थी वार्षिक परिवहन दर को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये किया गया तथा 5% वार्षिक मूल्यवृद्धि का प्रावधान किया गया। इसके अतिरिक्त नवगठित 4 जिलों (निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा, मैहर) में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिये 24 पदों में से 12 पदों की सृजन‑प्रतिस्थापन स्वीकृति मिली, साथ ही बाल संरक्षण योजना एवं सक्षम आंगनवाड़ी व पोषण 2.0 के तहत आउटसोर्सिंग के आधार पर मानव संसाधन की भी मंजूरी दी गई।
सिंचाई परियोजनाओं के लिये बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर एवं सिंगरौली जिलों में कुल 3076.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। बुरहानपुर में झिरमिटी मध्यम सिंचाई योजना को FY 2026‑27‑2030‑31 के लिये 922.91 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिससे 42 गांवों में लगभग 17,700 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। रायसेन में बारना वृहद सिंचाई परियोजना को 82.49 करोड़ रुपये और मंदसौर में कयामपुर‑सीतामऊ दाबयुक्त सूक्ष्म‑वृहद सिंचाई योजना को 750.83 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, जिससे क्रमशः 91,000 तथा 1,12,000 हैक्टेयर क्षेत्र में जलसिंचन होगा। सिंगरौली में चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म‑वृहद सिंचाई परियोजना को 1,320.14 करोड़ रुपये आवंटित कर 32,125 हैक्टेयर क्षेत्र को लाभान्वित किया जाएगा।
अंत में, 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिये विधि एवं विधायी कार्य विभाग के लिये 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं की निरंतरता, आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन हेतु 5,232 करोड़ रुपये और शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण हेतु 2,875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी पारित हुई।
