
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकी फंडिंग के संबंध में चल रहे मुकदमे में अलगाववादी नेता यासीन मलिक की जेल से पेश न होने की स्थिति को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि मलिक को वर्चुअली कोर्ट के सामने पेश होना था, परंतु वह निर्धारित समय पर नहीं आया। इस अनुपस्थिति को देखते हुए, जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली पीठ ने तुरंत जेल अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांग ली है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मलिक को क्यों नहीं बुलाया जा सका और जेल प्रशासन ने इस संबंध में कौन‑कौन से कदम उठाए हैं।
पीठ ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में यह जानकारी शामिल होनी चाहिए कि मलिक की जेल में स्थितियों, स्वास्थ्य स्थिति और संचार साधनों की उपलब्धता की क्या स्थिति है, तथा क्या कोई वैधानिक या प्रक्रियात्मक बाधा उनके वर्चुअल हाज़री को रोक रही थी। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि रिपोर्ट में कोई असंगत या अनियमित तथ्य सामने आते हैं, तो आगे की कार्यवाही के लिए सख्त उपाय अपनाए जाएंगे।
इस आदेश के साथ ही, अदालत ने जेल प्रबंधन को यह निर्देश भी दिया कि वे यासीन मलिक को भविष्य में किसी भी प्रकार की सुनवाई में, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या वर्चुअल, समय पर प्रस्तुत करने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करें। यदि जेल से कोई अन्य दस्तावेज़ या स्पष्टीकरण मांगे जाने की आवश्यकता होगी, तो वह भी शीघ्रता से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस प्रकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।
