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राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छात्रों की हिरासत में alleged मारपीट का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक तीखा बयान दिया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिये गये छात्रों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उजागर किया। यह घटना दिल्ली में आयोजित एक लोकतांत्रिक प्रदर्शन के बाद हुई, जहाँ कई विश्वविद्यालयों के छात्र चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।

राहुल गांधी ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लगभग दस छात्र को जबरन हिरासत में ले लिया और उन्हें “सख़्त” तरीके से ‘हैंड‑कफ़’ किया। उन्होंने कहा, “हमें यह देखकर गहरा दुःख और गुस्सा हो रहा है कि हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए पुलिस ने ऐसा बर्ताव किया। अगर ये मारपीट साबित होती है तो यह न केवल संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है बल्कि मानवाधिकारों की भी गंभीर उल्लंघन है।”

दिल्ली पुलिस ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि हिरासत में लिये गये छात्रों को “कोई शारीरिक मारपीट नहीं की गयी” और सभी को नियमों के अनुसार “विधिवत प्रक्रिया” के तहत ले जाया गया। पुलिस अधिकारी श्री राजेश सिंह ने कहा, “हमें किसी भी प्रकार की हिंसा का प्रमाण नहीं मिला, और सभी छात्रों को उनके अधिकारों के अनुसार दस्तावेज़ीकरण किया गया।”

इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की, परन्तु उन्होंने पहले कहा था कि चुनावी माहौल में शांति और व्यवस्था बनाए रखना अत्यावश्यक है। विपक्षी दलों ने इस पर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि “यदि इस तरह की घटनाओं की सच्ची जांच नहीं की गयी तो लोकतंत्र के मूलभूत स्तंभ कमजोर पड़ेंगे।”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि वे इस मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगामी चुनावों में इस प्रकार की ‘हिंसा’ को रोकने के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

साथ ही, कई मानवीय अधिकार संगठनों ने इस घटना को ‘रिपोर्ट’ किया और पुलिस के खिलाफ ‘सख़्त कार्रवाई’ की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘हिरासत में लिये गये छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की शारीरिक दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।’

इस विवाद के बाद, दिल्ली में कई शहरों में छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहाँ नागरिकों ने ‘न्याय और लोकतंत्र’ के लिये आवाज़ उठाई। घटना के आगे के विकास को लेकर सभी नजरें अब सरकार और चुनाव आयोग के कदमों पर टिकी हैं।

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