
रांची, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। झारखंड उच्च न्यायालय ने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित पेपर लीक से जुड़े मामले में आरोपी सुमन सौरव उर्फ सौरव सुमन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिका का खंडन करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और जांच के दौरान संकलित साक्ष्य पर्याप्त हैं।
सुनवाई में प्रतिवादी के वकील ने यह तर्क दिया कि उन्हें अभी तक किसी भी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है और जमानत से वे अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन को सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं। इसके जवाब में न्यायाधीश ने कहा कि पेपर लीक जैसी घोटालों से सार्वजनिक भरोसा और प्रतिस्पर्धा की पारदर्शिता पर गहरा असर पड़ता है, इसलिए ऐसे मामलों में कड़े कदम उठाना आवश्यक है।
जांच एजेंसी ने बताया कि लीक के पीछे एक विस्तृत नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा प्रश्नों को पहले ही प्राप्त कर उन्हें अनधिकृत रूप से वितरित किया गया। इस संबंध में सुरक्षा प्राधिकरण ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और अब तक सुमन सौरव के साथ जुड़े 12 अन्य व्यक्तियों की भी पूछताछ चल रही है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रतिवादी को जमानत मिलती है तो भविष्य में ऐसी ही गड़बड़ियों को रोकने के लिए चल रही जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसलिए जमानत का अनुरोध अस्वीकार कर उन्हें जेल में ही रखरखाव किया जाएगा।
वकील ने फैसला सुनते ही अपील दायर करने का इरादा व्यक्त किया, जबकि न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा होगी। इस निर्णय के बाद जेपीएससी ने कहा कि वह सभी प्रलेखित तथ्यों को आगे भी सार्वजनिक करेगा और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
