
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक सुरक्षा और जलापूर्ति व्यवस्था को सतत बनाना सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका को विस्तारित करने का निर्णय लिया है। इस दिशा‑निर्देश के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थानीय जल स्रोतों की स्थिति का नियमित निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और समय‑समय पर रख‑रखाव कार्यों को सुगम बनाने का अधिकार एवं दायित्व प्रदान किया जाएगा।
इसके साथ ही, केंद्रीय सरकार ने बताया कि नई नीति के तहत ग्राम पंचायतों को जल प्रबंधन में तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें जल शोधन इकाइयों का उन्नयन, टैंक और पाइपलाइन नेटवर्क का पुनरुद्धार, तथा जल स्रोतों के पुनर्भरण हेतु सामुदायिक जलाशयों का निर्माण शामिल है। इन सभी उपायों का उद्देश्य ग्रामीण आबादी को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे जल‑जनित रोगों में कमी आएगी।
जल जीवन मिशन 2.0 का एक प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका सृजन को भी प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत, जल स्रोतों के रख‑रखाव, मरम्मत और निगरानी कार्यों में स्थानीय युवाओं को रोजगार प्रदान किया जाएगा, जिससे न केवल जल सुरक्षा में सुधार होगा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण भी प्राप्त होगा।
अधिकारियों ने कहा कि ग्राम पंचायतों को अब जल स्रोतों की बुनियादी जानकारी जैसे स्रोत का प्रकार, क्षमता, जल स्तर और उपयोगकर्ता संख्या को एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। यह डिजिटल प्रणाली विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को आसान बनाएगी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।
संक्षेप में, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्राम पंचायतों को दी गई विस्तारित जिम्मेदारियों से ग्रामीण पेयजल प्रणाली को स्थायी, पारदर्शी और समुदाय‑मुखी बनाना लक्ष्य है, जिससे भारत में जल सुरक्षा की नई दिशा स्थापित होगी।
