
खण्डवा, 15 अक्टूबर (हिजरी)। मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में स्थित भव्य एकात्म धाम पर गुरुवार को प्रसिद्ध संत और मानस मर्मज्ञ मुरारी बापू का आगमन हुआ। भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत, इस दिव्य स्थल पर मुरारी बापू ने आदि शंकराचार्य की 108‑फीट ऊंची भव्य एकात्मता की प्रतिमा के दर्शन किये तथा पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। उसी अवसर पर उन्होंने एकात्म धाम की परिकल्पना और यहाँ चल रहे कार्यों पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
आचार्य शंकर की अद्वैत वेदांत परंपरा ने सम्पूर्ण भारत में एकता का संदेश दिया। वह स्वयं ही विभिन्न संस्कृतियों को एकसाथ लाने के अग्रदूत थे। इसी दर्शन के साथ, मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास ने ओंकारेश्वर में एकात्म धाम का भव्य निर्माण किया।
परियोजना के प्रथम चरण में पहले ही 108‑फीट ऊँची बहुधातु से बनी एकात्मता की मूर्ति स्थापित हो चुकी है, जो देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बन गई है। द्वितीय चरण में लगभग ₹2400 करोड़ की लागत से “अद्वैत लोक” संग्रहालय का निर्माण तेजी से हो रहा है, जो शंकर के दर्शन, विचारों और भारतीय सनातन संस्कृति के इतिहास को समर्पित होगा।
इस दौरान, कन्याकुमारी से केदारनाथ तक जारी है भारत स्वस्तिक यात्रा, जिसमें शंकर के जन्मस्थान कालड़ी (केरल) से होकर ओंकारेश्वर तक पहुँचे, और आगे केदारनाथ धाम तक प्रस्थान होगा। मुरारी बापू के आगमन के साथ-साथ महामंडलेश्वर नर्मदानंद बापजी, आवासीय आचार्य स्वामी भूमानंद सरस्वती, माँ पूर्णप्रज्ञा और रविशंकर गुरुकुल के आचार्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
इस पावन दिन पर ओंकारेश्वर के एकात्म धाम ने सभी को एकत्रित होकर शंकर की दिव्य शिक्षाओं को याद करने का अवसर दिया, और एकता व आध्यात्मिक समरसता के संदेश को फिर से प्रबल किया।
