
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। हैदराबाद से सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आज उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें वह वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं। याचिका में बताया गया है कि ओवैसी ने इस प्रक्रिया को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोजित होने वाले चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए चुनौती प्रस्तुत की है।
असदुद्दीन ओवैसी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत किए जाने वाले संशोधन से वोटर लिस्ट में अनुचित बदलाव हो सकते हैं, जो राजनीतिक दलों और मतदाताओं दोनों के लिए असमानता पैदा कर सकते हैं। इस याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों में वोटर लिस्ट को लेकर विवाद उत्पन्न हुए हैं, और ओवैसी ने इस बात को रेखांकित किया है कि न्यायिक प्रक्रिया के बिना किसी भी बड़े परिवर्तन को लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
याचिका के दाखिल होते ही उच्चतम न्यायालय ने इसे स्वीकार कर लिया है और मामला सुनवाई के लिए निर्धारित किया है। कोर्ट ने बताया कि इस मुद्दे पर गहन सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी, जिसमें दोनों पक्षों को अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। ओवैसी की याचिका को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि यह मामला आगामी चुनावी परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर पुनर्विचार हो सकता है।
इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कानूनी उपाय अपनाना आवश्यक है। अदालत की सुनवाई के परिणाम का इंतजार सभी राजनीतिक दलों और मतदाता संगठनों द्वारा किया जा रहा है, क्योंकि यह निर्णय भविष्य में वोटर लिस्ट के प्रबंधन और एसआईआर प्रक्रिया के संचालन को निर्धारित करेगा।
