
हावड़ा, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। हावड़ा के मौड़ी क्षेत्र में स्थित कुंडू चौधरी परिवार ने पिछले लगभग तीन शताब्दियों से एक विशिष्ट परम्परा को बनाए रखा है, जिसमें साल में दो बार दुर्गा उत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। इस परम्परा के अनुसार, वसंत ऋतु में मां बासंती की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जबकि शरद ऋतु में मां पार्वती की आराधना की जाती है।
परिवार के मुखिया के अनुसार, यह दोहराव वाली पूजा न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करती है, बल्कि स्थानीय संस्कृति में नौका पूजा की एक प्राचीन स्वरूप को भी जीवंत बनाती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष वसंत में, जब प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है, तो घर के सभी सदस्य मिलकर बासंती माँ की विशेष पूजा करते हैं, जिसमें पारम्परिक संगीत, पंक्तियों में गाए जाने वाले भजन और रंगीन पोशाकें शामिल होती हैं। उसी प्रकार, शरद ऋतु के आगमन पर, पार्वती माँ के सम्मान में एक अलग समारोह आयोजित किया जाता है, जिसमें विशेष रूप से तैयार किए गए प्रसाद और जल में डुबोई गई नौकों को नदी में आरक्षित किया जाता है।
इतनी लंबी अवधि तक यह परम्परा जीवित रहने का मुख्य कारण परिवार द्वारा दी गई निरंतर प्रतिबद्धता और स्थानीय समुदाय का समर्थन है। पड़ोसियों और निकटवर्ती वासियों ने भी इस परम्परा को अपनी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा माना है और हर वर्ष इन समारोहों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
इस प्रकार, हावड़ा के इस कुंडू चौधरी परिवार में नौका पूजा की प्राचीन परम्परा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि स्थानीय इतिहास और सामाजिक एकता की भी प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को इस समृद्ध विरासत को संजोने का अवसर प्रदान करती है।
