
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई की, जिसमें केंद्र सरकार, एफएसएसएआई, दिल्ली सरकार और फूड सेफ्टी कमिश्नर को उत्तर देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राजधानी में विभिन्न रेस्तरां, फूड कोर्ट और किराना स्टोर्स में पनीर के नाम पर बेचे या परोसे जा रहे डेयरी एनालॉग तथा नॉन-डैयरी उत्पाद वास्तविक पनीर नहीं हैं, फिर भी उन्हें पनीर के रूप में लेबल किया जा रहा है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन उत्पादों में अक्सर सोया, मटर प्रोटीन, नारियल तेल या अन्य पौध-आधारित सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जो उपभोक्ताओं को धोखा देने के समान है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उपभोक्ताओं, विशेषकर शिशु, वृद्ध व स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबंधित व्यक्तियों के लिए इस तरह के लेबलिंग से स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “जब तक ये उत्पाद फूड सेफ्टी एक्ट के तहत स्पष्ट रूप से वर्गीकृत नहीं होते, तब तक इनके लेबलिंग में पारदर्शिता आवश्यक है।”
सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि एफएसएसएआई को इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे डायरी एनालॉग उत्पादों को “पनीर” के रूप में विपणन करने पर प्रतिबंध लगाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार को स्थानीय स्तर पर निरीक्षण को सख्त करना चाहिए और अनियमित विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
कोर्ट ने सभी प्रतिवादी पक्षों को 15 दिन के भीतर लिखित उत्तर देने का निर्देश दिया, जिसमें वर्तमान नियमों की वैधता, संभावित संशोधन और उपभोक्ता सुरक्षा के उपायों को स्पष्ट किया जाए। यह सुनवाई दिल्ली में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों के संदर्भ में एक निर्णायक मोड़ बन सकती है।
