
भोपाल, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। आज मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय मीन्स‑कम‑मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस मंच का मुख्य विषय आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समय पर और उचित छात्रवृत्ति लाभ प्रदान करने पर गहन चर्चा करना है।
कार्यशाला में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला स्तर के शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्रधानाचार्य एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों ने भाग लिया और योजना की वर्तमान कार्यप्रणाली, चुनौतियों तथा सुधार के संभावित मार्गों पर विचार-विमर्श किया। सभी उपस्थित लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रवृत्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध वितरण और योग्य विद्यार्थियों की पहचान में सटीकता को बढ़ाया जाए।
विभाग ने बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2026 में लगभग 1.5 लाख योग्य छात्रों को कुल ₹ 250 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के लाभार्थियों को उनकी पारिवारिक आय, शैक्षणिक प्रदर्शन एवं सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, जिससे असमानता को कम करने में मदद मिलती है।
कार्यशाला के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को भी सुविधा मिल सके। साथ ही, योजना के मोनिटरिंग तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए समय‑समय पर ऑडिट और फील्ड विज़िट की व्यवस्था की जाएगी।
इस पहल के समर्थन में राज्य सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय मीन्स‑कम‑मेरिट छात्रवृत्ति योजना के सफल कार्यान्वयन से न केवल आर्थिक बाधाओं को दूर किया जाएगा, बल्कि योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बल मिलेगा। कार्यशाला का समापन विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने सभी सहभागी को धन्यवाद देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के मंचों के माध्यम से शैक्षणिक समावेशिता को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया।
