
दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। आज 15 अक्टूबर को भारत ने अपने अद्वितीय वैज्ञानिक‑सेना के नायक, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती मनाई। 1931 एड 15 अक्टूबर को तमिलनाडु के रामेश्वरम शहर में जन्मे कलाम जी ने न केवल देश के रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि अपने सादगी‑भरे जीवन से राष्ट्रसेवा की अनूठी मिसाल पेश की।
वह अपने शुरुआती दिनों में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में प्रमुख वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने कई सफल मिसाइल प्रोजेक्ट्स, विशेष रूप से अग्नि, अग्निपंखुड़ि और विकास की रचना में अहम योगदान दिया। इन उपलब्धियों ने भारत को एक स्वावलंबी रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित किया। उनके नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष तकनीक में भी महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की, जिससे भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अन्वेषण में स्वयं को एक सक्षम राष्ट्र के रूप में सिद्ध किया।
15 अक्टूबर, 1931 को जन्मे कलाम जी ने 2002 में 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, और इस पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और युवाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ज़ोर दिया। उनका मानना था कि “सपने वे नहीं होते जो हम सोते‑सोते देखते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते”। इस विचारधारा ने लाखों भारतीय युवाओं को प्रेरित किया और उनके भीतर नवाचार एवं उद्यमिता की भावना को जगा दिया।
डॉ. कलाम की सादगी, उनकी झुंझलाहट‑रहित जीवनशैली, और राष्ट्रीय हित के प्रति उनका अडिग समर्पण आज भी सभी वर्गों में आदर्श बना हुआ है। उनकी जयंती के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार, व्याख्यान और छात्र प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं, जहाँ उनके विचारों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हो रही है। इस प्रकार, 15 अक्टूबर न केवल उनके जन्मदिन का उत्सव है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति और नैतिक मूल्यों के प्रति उनके योगदान को स्मरण करने का दिन भी है।
