
रांची, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। झारखंड के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की योजना को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से टेंडर की वर्तमान स्थिति और आगे के कदमों के बारे में विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक (DGPI) ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने से छूट की याचिका दायर की; अदालत ने इसे स्वीकार कर अगले आदेश तक उन्हें सशरीर उपस्थित रहने से मुक्त किया। राज्य पक्ष से महाधिवक्ता रोहित राय ने बताया कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आरम्भ हो चुकी है। निर्धारित समय‑सारिणी के अनुसार, इच्छुक ठेकेदार 29 अक्टूबर तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं और 30 नवंबर को टेंडर की बिड आधिकारिक तौर पर खोली जाएगी।
बिड खुले बाद टेंडर की प्रगति से जुड़ी विस्तृत जानकारी अदालत में प्रस्तुत की जाएगी, जैसा कि महाधिवक्ता ने कहा। इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह थानों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी और पुलिस हिरासत में बंद व्यक्तियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है।
यह मामला इचागढ़ के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तरुण महतो से जुड़े एक कथित पुलिस बर्बरता से उत्पन्न हुआ है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस ने महतो को पकड़ा, थाने में ले गई और उनके साथ मारपीट तथा थर्ड डिग्री के उपयोग की रिपोर्ट मिली। महतो की पत्नी ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर शिकायत की, जिसके बाद अदालत ने स्वयँ इस मुद्दे को संज्ञान में लिया।
पिछली सुनवाई में अदालत ने सरायकेला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अब अदालत ने सरकार से टेंडर प्रक्रिया की प्रगति पर विस्तृत जवाब मांगा है। इस विवाद में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने अपना पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने सभी आवश्यक जानकारी प्रस्तुत की।
