
गरियाबंद, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी कार्यान्वयन और अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों को नियत समय‑सीमा में निराकरण करने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के लिए आज गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस सत्र का संचालन कलेक्टर रणबीर शर्मा के निर्देश पर सीएल तारक, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में नियुक्त किया गया है, ने किया। उन्होंने अधिनियम के पांवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या की और बताया कि कैसे आरटीआई के तहत प्राप्त प्रत्येक आवेदन को नियमों के अनुसार और समय‑सीमा के भीतर निपटाया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान मास्टर ट्रेनर तारक ने सूचना का अधिकार अधिनियम की मुख्य धाराओं, नियमों, आवेदन प्रक्रिया तथा लोक सूचना अधिकारियों के दायित्वों को विस्तार से बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित समय‑सीमा में कार्रवाई करना और आवेदकों को सही जानकारी उपलब्ध कराना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए अनिवार्य है। साथ ही पहले अपील और दूसरे अपील की प्रक्रिया, तथा अपील के बाद के न्यायिक चरणों की भी चर्चा की गई।
सत्र में आरटीआई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होने वाले आवेदनों के निराकरण की विधि, तथा जिले के जनसूचना अधिकारियों की पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों को बताया गया कि अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करके नागरिकों को समय पर सटीक जानकारी प्रदान करना न केवल उनके अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में विश्वास भी बनाता है।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ब्लॉक‑स्तर पर आरटीआई प्रक्रिया को सहज बनाना और आम जनता को सूचना के अधिकार का पूर्ण लाभ दिलाना था। इस बैठक में अपर कलेक्टर ऋषा ठाकुर, पंकज डाहिरे सहित कई जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने सत्र के अंत में प्रशिक्षण की उपयोगिता पर सकारात्मक टिप्पणी की और भविष्य में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
