
मंडसौर, 15 अक्टूबर (हिजरी संवत्सर)—नवरात्रि की पंचमी के अवसर पर इस साल भी मंडसौर के प्रसिद्ध नालछा माता मंदिर में माता रानी को चांदी के आभूषणों से सजीव रूप में सजाया गया। यह विशेष श्रृंगार सुबह से ही मंदिर के प्रवेश द्वार को अलंकृत कर रहा था और भक्तों की भीड़ को आकर्षित कर रहा था।
स्थानीय परम्परा के अनुसार, नालछा माता का यह शुभ श्रृंगार दशमी तक जारी रहता है। इस अवधि में प्रत्येक दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर का दौरा कर माता रानी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर में कहा जाता है कि माँ दिन के तीन अलग‑अलग समय पर तीन रूपों में प्रकट होती हैं। सुबह के समय माताजी का दर्शन बाल्यावस्था स्वरूप में किया जाता है, दोपहर में वह युवावस्था स्वरूप में दिखाई देती हैं और शाम को वृद्धावस्था स्वरूप में भक्तों को दर्शन देती हैं। इस अनोखी मान्यता के कारण कई परिवार संतान प्राप्ति की कामना लेकर मंदिर में उल्टा स्वस्तिक बनाकर अपनी मन्नत रखते हैं।
एक महत्वपूर्ण घोषणा भी इस दिन सामने आई। 25 अक्टूबर को जय माता दी ग्रुप द्वारा 3333 कन्याओं के पूजन का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण प्रक्रिया अभी चल रही है और इसमें भाग लेने वाली प्रत्येक कन्या को उपहार प्रदान किया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन ने कहा कि इस तरह के धार्मिक समागमों में सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा। साथ ही, मंदिर प्रबंधन समिति ने भक्तों को यह आश्वासन दिया कि सभी कार्यक्रम निर्धारित समय अनुसार और बिना किसी बाधा के संचालित किए जाएंगे।
नालछा माता के इस विशेष श्रृंगार और आगामी 3333 कन्याओं के पूजन ने न केवल धार्मिक भावना को उजागर किया है, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को भी एक नई उछाल दी है। भक्तों की उमड़ती भीड़ और शुद्ध भक्ति इस पावन अवसर को और भी यादगार बनाते हैं।
