
भोपाल, 15 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के इंदौर में निवेश हेतु ज़मीन उपलब्ध कराने और बाद में उसके उपयोग में परिवर्तन को लेकर कांग्रेस ने सार्वजनिक सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने 2007 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान किए गए एक निवेश समझौते का हवाला देते हुए संबंधित भूमि के आवंटन, उपयोग, डायवर्शन तथा बिक्री की लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि लगभग 490 करोड़ रुपये के निवेश और 4,000 लोगों को रोजगार देने के प्रस्ताव के बावजूद परियोजना ने घोषित लक्ष्य को पूरा नहीं किया।
नायक के अनुसार, JKM Investment Pvt. Ltd. के निदेशक अभिषेक मोदी के माध्यम से किए गए समझौते में 490 करोड़ रुपये का कुल निवेश, जिसमें 280 करोड़ रुपये विदेशी पूँजी शामिल है, तथा एक बड़े मॉल के निर्माण के जरिए 4,000 नौकरियों का सृजन प्रस्तावित था। कांग्रेस का दावा है कि निर्धारित स्थल पर होटल, आवासीय कॉलोनियों और अन्य इमारतों का विकास हुआ, न कि मूल योजना के अनुसार।
पार्टी के अनुसार, विवादित ज़मीन इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की योजना क्रमांक 151 में शामिल थी। कांग्रेस ने ज़मीन को योजना से मुक्त करने की प्रक्रिया और उसके बाद हुए उपयोग परिवर्तन की विस्तृत जांच की मांग की है। वे चाहते हैं कि यह स्पष्ट किया जाए कि जमीन किस उद्देश्य से दी गई थी, शर्तें क्या थीं और बाद में हुए विकास एवं बिक्री को कौन‑से अनुमतिपत्रों के आधार पर मंजूरी मिली।
नायक ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर बताया कि भू‑अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने पत्र क्रमांक 2044, दिनांक 5 मई 2024 और पत्र क्रमांक 5592, दिनांक 26 जून 2024 के माध्यम से इस मामले में पत्राचार किया था, फिर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने 2010 के विभागीय पत्राचार और 2023 में हुई ज़मीन विकास‑बिक्री संबंधी गतिविधियों की भी जांच की माँग की।
इन्फोसिस को आवंटित लगभग 130 एकड़ जमीन को वापस लेने के उदाहरण को उठाते हुए नायक ने पूछा, “यदि निर्धारित उद्देश्य पूरा न हो तो ज़मीन वापस ली जा सकती है, तो इस मामले में क्यों नहीं?” उन्होंने राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में नियम‑पालन की कड़ी निगरानी को ज़मीन‑संबंधी आरोपों की जाँच के समान महत्व देने का आह्वान किया।
कांग्रेस ने चार प्रमुख मांगें रखी: (1) लोकायुक्त द्वारा निष्पक्ष जांच, (2) 2007 के एमओयू एवं योजना क्रमांक 151‑169‑A में परिवर्तन के दस्तावेज़ों की जाँच, (3) ज़मीन डायवर्शन, कॉलोनी विकास और बिक्री की वैधानिकता की समीक्षा, तथा (4) संभावित सरकारी राजस्व हानि का आकलन। यदि आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने सहित अन्य कानूनी कदम उठाने को तैयार है।
