भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में मानसून (Monsoon) की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के बीच अब आंधी-बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। 15 से 18 अक्टूबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम बदला रहेगा। ग्वालियर-चंबल संभाग (Gwalior-Chambal Division) में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, जबकि उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में बारिश हो सकती है। इसके बाद 16, 17 और 18 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव आने की संभावना है।
सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी
इस साल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह करीब 1.5 इंच पानी कम बरसा और कुल बारिश सामान्य से लगभग चार प्रतिशत कम रही। हालांकि, पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के आंकड़ों में बड़ा अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। इसका मतलब है कि प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा पूरे हालात को नहीं दर्शाता। कई जिलों में पर्याप्त पानी गिरा, तो कई इलाकों में बारिश की कमी बनी रही।
पश्चिमी मध्यप्रदेश में ज्यादा कमी
पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी अधिक रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इन जिलों में कमी का आंकड़ा नौ से 51 प्रतिशत तक रहा। पूर्वी मध्यप्रदेश में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कुल आंकड़े में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। हालांकि, इस क्षेत्र के भी कुछ जिलों में कमी रही। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
जून की कमी पूरी नहीं कर पाया मानसून
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार आया, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक जैसी स्थिति बनी और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम से बारिश बढ़ी, फिर भी जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह रही कि जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश के बावजूद पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से चार प्रतिशत नीचे रह गया। अब अक्टूबर में सक्रिय हो रहे नए सिस्टम से प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश की उम्मीद है। हालांकि, यह बारिश पूरे मानसूनी सीजन की कमी की भरपाई कर पाएगी या नहीं, इसका आकलन बारिश की वास्तविक मात्रा सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
