
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने अपने चेयरपर्सन डी. थारा के नेतृत्व में 10 अक्टूबर को शहर के 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास गेटों को अस्थायी रूप से बंद करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में बिना शर्त माफी की माँग की गई है, जिससे उस दिन यात्रियों को हुए असुविधा के लिए संस्थान की जिम्मेदारी स्वीकार की गई है।
डी. थारा ने न्यायालय को बताया कि 10 अक्टूबर को लागू किए गए प्रतिबंध का उद्देश्य सुरक्षा संबंधी कारणों और विशेष आयोजन के कारण था, लेकिन इस कदम ने कई यात्रियों को अनपेक्षित कठिनाइयों में डाल दिया। उन्होंने कहा कि मेट्रो संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए, और भविष्य में ऐसे निर्णयों को लेकर अधिक सावधानी बरती जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने इस दायर किए गए हलफनामे को स्वीकार कर लिया है और बिना शर्त माफी को मान्य करने की प्रक्रिया को शुरू किया है। इस निर्णय के बाद, डीएमआरसी ने कहा कि वह सभी प्रभावित यात्रियों को उचित समाधान प्रदान करेगा और बंद किए गए प्रवेश और निकास गेटों की पुनः सक्रियता के साथ साथ सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाएगा।
इस घटना ने दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में अचानक परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा को फिर से उजागर किया है। विशेषज्ञों ने संकेत किया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए पूर्व सूचना प्रणाली को अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए, जिससे यात्रियों को समय पर सूचित किया जा सके।
इस प्रकार, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने 10 अक्टूबर के बंद के कारण उत्पन्न हुए विवाद को सुलझाने के लिये उच्चतम न्यायालय में अपना हलफनामे दायर किया और बिना शर्त माफी की मांग रखी, जिससे सार्वजनिक भरोसा पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
