
रांची, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने 2026 में आयोजित होने वाली इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि) में पारा शिक्षकों को शामिल करने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय सुनाया। पारा शिक्षकों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिये झारखंड उच्च न्यायालय में अंतरिम राहत के लिये याचिका दायर की थी, जिसमें वे चाहते थे कि उन्हें इस परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाये। हालांकि, न्यायालय ने याचिका को अस्वीकार कर दिया और किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत प्रदान नहीं की।
न्यायालय के आदेश के बाद, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि पारा शिक्षकों को अब भी अभ्यावेदन देने की पूरी स्वतंत्रता है और उन्हें अपने आवेदन सीधे विभाग को जमा करने की अनुमति है। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि इस निर्णय के बावजूद, पारा शिक्षकों को अपनी योग्यता के अनुसार चयन प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार बना रहेगा और वे अपने अभ्यावेदन के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जेएसएससी द्वारा निर्धारित सभी मानदंडों का पालन किया जायेगा और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।
इस निर्णय के बाद पारा शिक्षकों ने सामाजिक मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त की, जबकि कई शिक्षा संघों ने कहा कि यह निर्णय पारा वर्ग के शिक्षकों के लिए असमानता की भावना को बढ़ा सकता है। पक्षकारों ने आगे न्यायिक पुनरीक्षण की संभावना भी जताई है। इस बीच, जेएसएससी ने कहा कि परीक्षा का शेड्यूल और चयन प्रक्रिया पहले से तय है और सभी इच्छुक उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान किया जायेगा। यह मामला अभी भी शिक्षा नीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच के संतुलन को लेकर चर्चा का कारण बना हुआ है।
