
लखनऊ, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। इस वर्ष के बुधवार को लोकभवन में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया, जहाँ उ.प. राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की आत्मकथा — ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ — का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की मेजबानी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की और उन्होंने पुस्तक की महत्ता व देशभक्ति को उजागर करते हुए कहा, “यह रचना हमारे लोकतांत्रिक इतिहास की गाथा को नए सिरे से प्रस्तुत करती है और युवा पीढ़ी को प्रेरणा देती है।”

समारोह में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में भाजपा के वरिष्ठ नेता, विभिन्न साहित्यिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं पत्रकार शामिल थे। पुस्तक में कोविद जी ने अपने बचपन, भारतीय सेना में सेवा, राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों एवं भारतीय संविधान के निर्माण में हुए संघर्षों को विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा, “मैंने अपने पूरे जीवन में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ सिद्धांत को अपनाया है, और यही भावना भाजपा में भी प्रमुख रूप से देखी गई है।”

राष्ट्रपति कोविद ने इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया कि भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता के लिए हर नागरिक का योगदान आवश्यक है और उन्होंने युवा वर्ग को सार्वजनिक सेवा में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी पुस्तक को “मेरी व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जीत की कहानी” कहा।
समारोह के अंत में, सभी अतिथियों ने पुस्तक को सम्मानित करने के लिए ताली बजाई और कोविद जी को बधाई दी। पुस्तक की बिक्री राजस्व का एक हिस्सा सामाजिक कल्याण कार्यों के लिये earmarked किया गया है, जिससे सामाजिक उत्थान में भी योगदान दिया जा सके। इस प्रकार, ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा’ न केवल एक आत्मकथा बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति एक श्रद्धांजलि बनकर उभरी।
