
ग्वालियर, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। ग्वालियर के प्रसिद्ध सिंधिया राजपरिवार की लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़ी एक बहुचर्चित मामले में आज अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह मामला कई सालों से विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर रहा था और इसमें विभिन्न परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के वितरण को लेकर गंभीर विवाद चल रहा था।
न्यायालय ने इस सत्र में यह स्पष्ट किया कि प्रतिमा देवी को 29 अक्टूबर 2026 को अदालत में पेश होना अनिवार्य होगा, जहाँ उन्हें धोखाधड़ी के सबूत प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि प्रतिमा देवी को सभी दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जो संपत्ति के बंटवारे में अनियमितताओं को दर्शाते हैं, उन्हें संलग्न करना आवश्यक है।
जज ने कहा, “यदि प्रतिमा देवी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ों में कोई अनियमितता या धोखाधड़ी का संकेत मिलता है, तो अदालत उचित कार्रवाई करेगी, जिसमें दंडात्मक उपाय भी शामिल हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि बंटवारा से संबंधित सभी मामलों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस निर्देश के साथ यह भी कहा कि सभी पक्षकारों को इस प्रक्रिया के दौरान सहयोग करना चाहिए और कोर्ट की किसी भी अतिरिक्त मांग को पूरा करना होगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल प्रतिमा देवी तक सीमित नहीं है; अन्य संबंधित पक्षों को भी समान दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता होगी।
इस निर्णय के बाद, परिवार के कई सदस्य कोर्ट के फैसले पर नजर रखेंगे और उम्मीद कर रहे हैं कि इस दिशा-निर्देशों के अनुपालन से धोखाधड़ी के आरोपों की पूरी तरह से जांच हो सके और निष्पक्ष बंटवारा सुनिश्चित हो सके। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है, और कई कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संपत्ति विवाद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुकदमा बताया है।
