
सुरजपुर, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के केशवनगर गांव की सोन कुमारी प्रजापति ने आर्थिक तंगी और बच्चों की शिक्षा के खर्चों से जूझते हुए स्वरोजगार का मार्ग चुना। परिवार की रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने और बच्चों की पढ़ाई के लिये पर्याप्त आय न मिलने की स्थिति में उसने पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों के व्यवसाय में कदम रखा।
सुरुआत में सीमित संसाधनों के कारण कठिनाइयाँ सामने आईं, परंतु छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना ने उसे आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की। इस योजना के तहत उसे शुरुआती पूँजी और किफायती ऋण मिला, जिससे वह अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकी और स्थानीय बाजार में अपने उत्पादों को स्थापित कर सकी।
सोन कुमारी ने मिट्टी को छानने, आकार देने और बर्तन तैयार करने की प्रक्रिया को खुद ही सीखा, तथा पारम्परिक डिज़ाइन को आधुनिक उपभोक्ता मांग के अनुरूप ढालने की कोशिश की। अब उसके बनाए हुए थाली, कटोरी और अन्य बर्तन नजदीकी गाँवों के साथ-साथ जिला बाजार में भी बिकते हैं। इस व्यवसाय से होने वाली आय से वह न केवल परिवार के रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करती हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई के लिये भी पर्याप्त फंड सुरक्षित कर पाती हैं।
सामाजिक दायरे में भी उसकी सफलता को सराहा जा रहा है। कई युवा महिलाएँ अब उसकी प्रेरणा लेकर समान व्यवसाय शुरू करने का विचार कर रही हैं। सक्षम योजना के माध्यम से मिली यह वित्तीय मदद न केवल सोन कुमारी को आर्थिक रूप से स्थिर बना रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के स्वरोजगार के लिए एक मॉडल स्थापित कर रही है।
वर्तमान में वह अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिये अतिरिक्त मशीनरी खरीदने की योजना बना रही हैं और भविष्य में ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से अपने बाजार को और विस्तृत करने की सोच रखती हैं। इस प्रकार सोन कुमारी प्रजापति ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है।
