
बागेश्वर धाम, 12 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा का काफिला, जो बागेश्वर धाम से प्रारम्भ हुआ है, कुल 500 किमी की दूरी तय करने वाला है और इस यात्रा में पाँच जिलों से होकर गुजरते हुए अंततः छतरपुर तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। रथयात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना, धार्मिक सद्भावना को प्रोत्साहित करना और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देना बताया गया है।
यात्रा के दौरान कई स्थानों पर बड़े जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और धार्मिक गुरुओं ने हिस्सा लेकर इस पहल को समर्थन दिया है। इस क्रम में बागेश्वर धाम के प्रमुख पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, “जितने भी विरोधी इस मार्ग में आ जाएँ, चाहे प्राण को भी त्यागना पड़े, धर्म की रक्षा के लिये हमें आगे बढ़ना ही होगा। हम इस रथयात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि हमारे देश में व्याप्त असंतोष और विभाजन के कारण गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा देश है, और इस स्थिति को बदलने के लिये सभी को मिलकर प्रयास करना आवश्यक है।”

शास्त्री ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक तनाव को नियंत्रित नहीं किया गया तो राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ सकती है, जिससे देश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सभी भारतीय नागरिकों से अपील की कि वे इस आंदोलन को समर्थन दें, शांति और भाईचारे के सिद्धांतों को अपनाएँ, तथा “इसे बचाएँ” के नारे के साथ राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित बनाने में योगदान दें।
रथयात्रा के आयोजकों ने कहा कि इस यात्रा में कुल वहेलियों, पंडितों और स्वयंसेवकों की संख्या लगभग दो हजार के आसपास है, और यह समूह हर गुजरते जिले में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित रूप से यात्रा जारी रखेगा। इस प्रकार, सनातन हिंदू एकता रथयात्रा न केवल एक धार्मिक अभिव्यक्ति है, बल्कि सामाजिक समरसता को बढ़ाने और राष्ट्र को एकजुट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनकर उभरी है।
