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लावण्या के नन्हे कदमों को मिली नई उम्मीद, कैलिपर से जागी आत्मनिर्भरता की रोशनी

धमतरी, 12 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। नौ वर्षीय लावण्या साहू को पहली बार अपने पैरों पर खड़ा देख उसके माता‑पिता के आँसू खुशी से छलक पड़े। सामान्य बच्चों की तरह स्वतंत्रता से चलना और खेलना लावण्या और उसके परिवार के लिये एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि बचपन में ही उसे निदान से पता चला था कि उसके पैरों में मोटर क्षमता कमज़ोर है। विशेषज्ञों की टीम ने लावण्या को कैलिपर की सहायता से समर्थन प्रदान किया, जिससे वह धीरे‑धीरे संतुलन बनाए रख पाई। अब वह स्कूल के मैदान में अन्य बच्चों के साथ खेल रही है और उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक साफ़ दिख रही है। चिकित्सकों ने कहा कि उचित निदान और समय पर पुनर्वास उपकरण जैसे कैलिपर, छोटे‑छोटे रोगियों में आत्मनिर्भरता की भावना को पुनर्जीवित कर सकते हैं। लावण्या की कहानी धमतरी में कई परिवारों के लिये प्रेरणा बन गई है, जो समान परिस्थितियों में आशा की किरण देख रहे हैं।

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