
जगदलपुर, 12 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। हाल ही में बताया गया कि रियासत‑कालीन बस्तर दशहरा में राम‑रावण की कथा से कोई संबंध नहीं है। इस पारम्परिक महोत्सव में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता. इसके बजाय बस्तर की पूजनीय मां दंतेश्वरी सहित बस्तर संभाग की देवी‑देवताओं की पूजा‑अर्चना को 13 दिनों तक निरंतर जारी रखा जाता है। यह समारोह स्थानीय जनमानस में धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।
