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MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग

शाजापुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए वन विभाग ने अनोखा तरीका अपनाया है. शुजालपुर, कालापीपल और उज्जैन जिले के सीमावर्ती इलाकों में कृष्णमृग और नीलगाय (Blackbuck and Nilgai) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) चलाया जा रहा है. अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी गांव में बोमा पद्धति से 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया.

शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।


कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम का सहयोग ले रहा है. अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित क्षेत्रों में भेजना है, ताकि किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।


हेलीकॉप्टर से हांका, बोमा तकनीक से पकड़े कृष्णमृग
रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले चरण में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को हांका देकर एक निर्धारित घेरे की ओर पहुंचाया गया. इसके बाद बोमा तकनीक से उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया. अभियान के दौरान दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर विशेषज्ञों की सलाह के बाद रेस्क्यू रोक दिया गया. अगले चरण को शनिवार देर शाम या रविवार सुबह शुरू करने की योजना बताई गई।


आयोजकों के अनुसार, हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा पद्धति के जरिए वन्यजीवों को रेस्क्यू करने की शुरुआत लगातार दूसरे वर्ष शुजालपुर क्षेत्र से की गई है. पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।


दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ, करीब 200 कर्मचारी तैनात
इस विशेष अभियान में दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं. इनके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं. भोपाल सहित दूसरे जिलों से पहुंचे कर्मचारियों को मिलाकर करीब 200 लोगों की टीम अभियान में जुटी है।


इससे पहले ग्राम हन्नूखेड़ी में अभियान की तैयारियों का निरीक्षण वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और अभियान की नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन समेत अन्य अधिकारियों ने किया. अधिकारियों ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम से चर्चा कर तैयारियों और अभियान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


ग्रामीणों के लिए जारी किए गए सुरक्षा निर्देश
वन विभाग और जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। ग्रामीणों से कहा गया है कि अभियान की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और ऑपरेशन समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई या अन्य गतिविधियां न करें. बच्चों को खेतों, सड़कों और बोमा स्थल से दूर रखने तथा गाय, भैंस, बकरी और कुत्तों सहित पालतू पशुओं को खुले में नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है।


वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरने या भगाने की कोशिश न करें और हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर निकलकर भीड़ न लगाएं. निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण
कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है।

किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील
अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है।

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