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बंगाल के रेजीनगर में 70% मुस्लिम वोटर…. BJP की जीत ने तोड़े राजनीति के कई समीकरण

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के रेजीनगर विधानसभा सीट (Rejinagar Assembly seat) पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शानदार सफलता हासिल की है. बीजेपी (BJP) की ये जीत पश्चिम बंगाल में नए अलाइनमेंट की कहानी कहती है. इस जीत ने बंगाल की राजनीति के कई बना-बनाए समीकरणों को तोड़ दिया है. दरअसल रेजीनगर वो सीट है जहां के लगभग 70 फीसदी मतदाता मुसलमान है. यही नहीं कुछ ही महीने पहले यहां हुए विधानसभा चुनाव में बंगाल के बड़े मुस्लिम नेता हुमायूं कबीर ने जीत हासिल की थी. हमायूं कबीर वही हैं जिन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा कर इस चुनावी राज्य में सनसनी फैला दी थी।


विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर नउदा और रेजीनगर दोनों ही सीट से चुनाव लड़े और दोनों ही जगहों से जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया। अब जब यहां उपचुनाव के बाद नतीजे आए हैं तो बीजेपी ने चौंका दिया है. बीजेपी कैंडिडेट शंखारभ सरकार ने 75 हजार वोटों से इस सीट पर जीत हासिल की है।


जनसंख्या के धार्मिक बंटवारे को देखकर इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की जीत की संभावनाओं पर सवाल उठ रहे थे. भगवा खेमे ने यहां जीत हासिल करके राजनीतिक समीकरण बदल दिया. इसके साथ ये विचार उठ रहा है कि क्या अब बंगाल के मुस्लिम भी शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा कर रहे हैं.


चुनाव नतीजों के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने कहा कि बंगाली मुसलमान अब भाजपा समर्थक हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अधिकांश बंगाली मुसलमान राज्य के विकास यज्ञ में भाजपा का साथ देना चाहते हैं. आने वाले दिनों में हमें 60% वोट मिलेंगे।


मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को उपचुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बीजेपी को रेजिनगर में 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले.”


नंदीग्राम में भी बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की है.
सीएम शुभेंदु ने दावा किया कि भाजपा को लेकर अल्पसंख्यकों में लंबे समय से डर और आशंका फैलाई जा रही थी. उन्होंने आरोप लगाया कि यह दुष्प्रचार भी किया गया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो मुसलमानों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा और उन्हें नजरबंदी शिविरों में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि पिछले पांच महीनों में राज्य सरकार के कार्यों को देखने के बाद यह धारणा बदल गई है. उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय की महिलाएं भी विकास कार्यों में भाग ले रही हैं.”


विकास और रोजगार पर जोर, बाबरी मस्जिद पर घोषणा का असर नहीं
रेजिनगर उपचुनाव में बीजेपी के चुनावी अभियान का एक सबसे अहम पहलू विकास और रोजगार पर जोर था. अभियान के अंतिम चरण में बाबरी मस्जिद पर केंद्रित भावनात्मक राजनीति के बजाय, पुल, अस्पताल, कॉलेज, औद्योगिक पार्क और रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए. हुमायूं कबीर ने कहा था कि वे मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाएंगे. लेकिन मुस्लिम मतदाताओं ने इसे चुनावी प्लैंक माना।


बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में प्रचार किया और दावा किया कि आम जनता को धार्मिक विवादों से कहीं अधिक विकास और रोजगार की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी अपने चुनाव प्रचार में स्थानीय बुनियादी ढांचे और रोजगार से संबंधित वादों पर जोर दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस रणनीति ने भाजपा को पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से परे जाकर मतदाताओं तक पहुंचने में सक्षम बनाया है।


हुमायूं कबीर का प्रभाव कम
2026 के विधानसभा चुनावों में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने रेजिनगर निर्वाचन क्षेत्र से 1,23,536 वोट प्राप्त करके जीत हासिल की. ​​चुनाव आयोग द्वारा जारी परिणामों के अनुसार भाजपा के बापन घोष को 64,660 वोट और तृणमूल के अताउर रहमान को 41,718 वोट मिले. इसका मतलब यह है कि पिछले चुनावों में भाजपा भले ही दूसरे स्थान पर रही हो, लेकिन विजयी उम्मीदवार से उसका अंतर काफी अधिक था।


उपचुनाव में स्थिति तब बदल गई जब हुमायूं कबीर ने नउदा सीट बरकरार रखी और रेजिनगर सीट छोड़ दी. आम जनता उन्नयन पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारकर इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास विफल रहा. उनके बेटे की लोकप्रियता हुमायूं कबीर जितनी नहीं है. इतने बड़े मतदाता वर्ग में वह अपेक्षाकृत नए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि यही एक कारण है कि मतदाता भाजपा उम्मीदवार पर भरोसा कर रहे हैं. क्योंकि इस भरोसे के पीछे उन्हें शुभेंदु का चेहरा दिखता है।


शुभेंदु का संदेश
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने रेजिनगर में 200 बिस्तरों वाले अस्पताल, नए पुल, कॉलेज और औद्योगिक पार्क जैसी कई परियोजनाओं का वादा किया. चुनाव प्रचार के दौरान प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने का मुद्दा भी उठाया गया. रेजीनगर में यह शुभेंदु की सबसे बड़ी सफलता साबित हुई. उन्होंने जनता से भारी संख्या में मतदान करने का आह्वान भी किया. उन्होंने कहा कि वे विकास करेंगे और सभी का साथ देंगे, बशर्ते वे चुनाव जीतें.


चुनाव के दिन हुमायूं कबीर से जुड़े विवाद का प्रभाव
6 अक्टूबर को मतदान के दिन आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के साथ पुलिस की झड़प और उनकी गिरफ्तारी ने रेजिनगर में चुनावी तनाव को और बढ़ा दिया. हुमायूं कबीर ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था. विपक्ष ने भी पुलिस कार्रवाई के आरोप लगाए. हालांकि भाजपा और राज्य नेतृत्व ने मतदान में धांधली के आरोपों का खंडन किया. राजनीतिक हलकों का मानना ​​है कि इस घटना का चुनाव प्रचार और मतदान के दिन के राजनीतिक माहौल पर गहरा असर पड़ा.


संभलकर चले बीजेपी कैंडिडेट
रेजिनगर से भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने पूरे चुनाव के दौरान संभलकर बयान दिया. उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों की बात मत कीजिए. बंगाल के लोग यह सब सुनकर थक चुके हैं. अब बंगाल में सिर्फ एक ही नारा गूंजेगा, हमें यहां विकास चाहिए, हमें रेजिनगर में कॉलेज चाहिए, हमें उद्योग चाहिए.”


उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक बहुत बुद्धिमान है. जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, तब वे कांग्रेस के साथ थे. बाद में जब वामपंथी सत्ता में आए, तब वे वामपंथियों के साथ थे. ममता बनर्जी की सरकार में सभी अल्पसंख्यकों ने सिर्फ तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया. अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार है, इसलिए अल्पसंख्यकों ने अपने विकास के हित में भाजपा को वोट दिया है।

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