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विकसित भारत बिल्डथॉन-2025 के लिए जिलास्तरीय निर्णायक समिति का गठन

रायपुर, 16 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित “विकसित भारत बिल्डथॉन-2025” कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु जिले में जिलास्तरीय निर्णायक समिति का गठन किया गया है। यह समिति प्रबंध संचालक, राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा, छत्तीसगढ़, रायपुर के निर्देशानुसार गठित की गई है। जिलास्तरीय निर्णायक समिति में अपर कलेक्टर नम्रता आनंद डोंगरे को अध्यक्ष तथा जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे को सचिव नियुक्त किया गया है। समिति में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, उच्च शिक्षा, साक्षरता मिशन एवं पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े अनुभवी अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार विकसित भारत बिल्डथॉन-2025 (वीबीबी) का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार एवं समस्या-समाधान कौशल का विकास करना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्मार्ट भारत, स्वच्छता, लोकल फॉर वोकल तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे राष्ट्रीय विषयों पर नवाचारी प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए प्रेरित करता है। कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के एक करोड़ विद्यार्थियों को राष्ट्रीय विकास के लिए रचनात्मक समाधान सोचने और विकसित करने हेतु प्रेरित करना, अनुभव-आधारित सीखने के माध्यम से विद्यालयों में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित स्वदेशी एवं सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।

समिति के अन्य सदस्यों में अंकिता मरकाम (सहायक आयुक्त), आदित्य शर्मा (जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास), सुनील गुप्ता (सहायक प्राध्यापक, स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय), श्रीकांत लॉजेवार (प्राचार्य, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोथारी), गणेश यादव (जिला परियोजना अधिकारी, जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण), गौरव कुमार त्रिपाठी (सहायक परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा), विपिन कुमार पाण्डेय (विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मनेन्द्रगढ़), जसवंत डहरिया (व्याख्याता, शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय) तथा सोनू सिंह उरांव (अध्यक्ष, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई, चनवारीडांड) शामिल हैं।

जिला स्तरीय निर्णायक समिति “विकसित भारत बिल्डथॉन-2025” के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नवाचार, तकनीकी विचारों एवं रचनात्मक परियोजनाओं का मूल्यांकन कर सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन करेगी। इस पहल से विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी सोच एवं समस्या समाधान क्षमता को प्रोत्साहन मिलेगा और वे विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभा सकेंगे।

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