विश्व अशांति के दौर में भारत की संयमित आवाज
डॉ राघवेंद्र शर्मा
हमें कब, कहां, क्या, बोलना चाहिए या नहीं बोलना चाहिए, या फिर हमें कब, कहां, क्या, करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, यह सावधानी बड़े मायने रखती है। क्योंकि हमारे विद्वान कह गए हैं - बिना बिचारे जो करे सो पांछे से पछताय। काम बिगाड़े आपनो, जग में होत हंसाय।। अर्थात बिना विचार किये जो भी व्यक्ति कुछ कहता या करता है, वह खुद का काम तो बिगाड़ता ही है, साथ में हंसी का पात्र भी बनता है। आज यही हालत खुद को दुनिया का ठेकेदार मानने वाले देशों और वहां के कतिपय नेताओं की हो गई है।अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों बोला ? सब जानते हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दुश्मनी डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ऊपर क्यों ली? यह भी सबको पता है। रूस यूक्रेन लंबे समय से क्यों एक दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं, यह भी किसी से छुपा नहीं है। रह जाती है खाड़ी देशों की बात, तो वहां से भी अच्छे समाचार नह...









