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Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य

नई दिल्ली। ईरान युद्ध (Iran America War) के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी तरफ, इस अनिश्चितता के बीच सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। लिहाजा, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से वैश्विक स्तर पर सोने का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य भारत और ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) की संयुक्त अर्थव्यवस्था यानी साझा GDP से भी काफी बड़ा माना जा रहा है।


विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता आई है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने वाली है।


क्यों कहा जा रहा है ‘फाइनेंशियल सुपरपावर’?
एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में इस तेज बढ़ोत्तरी के कारण दुनिया में मौजूद कुल सोने का अनुमानित मूल्य 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की कुल जीडीपी फिलहाल लगभग 3.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर के बीच है जिसके जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यूनाइडेट किंगडम यानी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस तरह सोने का कुल मूल्य दोनों देशों की संयुक्त जीडीपी से कई गुना बड़ा हो गया है। इसी कारण कुछ विश्लेषक इसे “गोल्ड सुपरपावर” कह रहे हैं।


निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना
जब दुनिया में युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। इसलिए हर बार किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद, महामारी के बाद बढ़ी महंगाई, डॉलर और अन्य मुद्राओं पर बढ़ती अनिश्चितता।


आगे क्या होगा?
हालांकि विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष कम होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कागजी मुद्राओं पर कम होते भरोसे के कारण सोना लंबे समय तक मजबूत निवेश बना रह सकता है। बहरहाल, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभर रहा है, जिसका कुल मूल्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक हो चुका है।

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