उन्नाव। उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में उद्घाटन के महज 12 दिन बाद सड़क धंसने की घटना सामने आई है। लगातार बारिश के बीच उन्नाव जिले में एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि निर्माण एजेंसी का कहना है कि प्रभावित हिस्से की तत्काल मरम्मत कर दी गई है।
उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में धंसी सड़क
जानकारी के अनुसार, घटना उन्नाव जिले के कोरारी क्षेत्र के पास हुई। कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर करीब 5 से 7 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने से यह नुकसान हुआ।
सपा नेता ने वीडियो साझा कर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के नेता मधुसूदन यादव ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य पर सवाल उठाए। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने भी परियोजना की गुणवत्ता और उसकी मजबूती को लेकर चिंता जताई। कई लोगों का कहना है कि यदि पहली ही भारी बारिश में सड़क प्रभावित हो जाती है, तो इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा और टिकाऊपन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एजेंसी ने शुरू कराया मरम्मत कार्य
घटना की जानकारी मिलते ही निर्माण एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार सड़क को जल्द दुरुस्त कर यातायात प्रभावित होने से बचाने का प्रयास किया गया। एजेंसी का दावा है कि मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया, ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।
अभी नहीं आया आधिकारिक कारण
सड़क धंसने की वास्तविक वजह को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि नुकसान केवल बारिश की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई तकनीकी या निर्माण संबंधी कारण भी हैं। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
13 जुलाई को हुआ था उद्घाटन
63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय रक्षा मंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। इस परियोजना का उद्देश्य लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाना है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई इस घटना ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
