डिजिटल युद्ध के झांसे में युवा वर्ग
सुरेश हिंदुस्तानी
कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति या समाज को उद्देश्य विहीन करने के लिए उसको किसी विषय में ऐसा उलझा दिया जाए, जो उसकी दिशा को बदल दे। आज सोशल मीडिया पर बहुत बड़े पैमाने पर यही खेल चल रहा है। तर्क और कुतर्क के सहारे नैरेटिव गढ़ने का यह प्रयास निश्चित ही देश के लिए घातक ही कहा जाएगा। आज सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रचार में भी यह बात गहरे तक दिखाई देती है। समाज को इससे निकलने का प्रयास करना चाहिए, नहीं तो आने वाला समय अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा ही होगा। खास बात यह है कि इस नैरेटिव को युवा वर्ग और समाज के बीच ले जाने का कार्य कुछ राजनीतिक दल के नेता कर रहे हैं। आज नैरेटिव चलाने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग भी किया जा रहा है। जो एक प्रकार से युद्ध के रूप ले चुका है। आज सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग समाज में भेद पैदा करने और युवाओं के मानस को भ्रमित करने ...








