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आर्थिक

ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा सैन्य टकराव (Military confrontation) अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Agreement) पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है। इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान?फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर...
लद्दाख में ओएनजीसी की बड़ी सफलता, दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पूरी; स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी रफ्तार

लद्दाख में ओएनजीसी की बड़ी सफलता, दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पूरी; स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी रफ्तार

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुगा घाटी में दूसरे जियोथर्मल (भू-तापीय) कुएं की सफलतापूर्वक खुदाई पूरी कर ली है। इस उपलब्धि के साथ भारत के पहले प्रायोगिक जियोथर्मल बिजली संयंत्र की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। एक महीने में पूरी हुई 1,000 मीटर गहरी खुदाई ओएनजीसी ने बताया कि उसकी अनुसंधान एवं विकास इकाई ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने समुद्र तल से करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पुगा घाटी में लगभग 1,000 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग का काम करीब एक महीने में पूरा किया। कंपनी के अनुसार यह अभियान पहले जियोथर्मल कुएं की तुलना में कम समय और कम लागत में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पहले कुएं से मिले थे उत्साहजनक संकेत यह दूसरा कुआं पहले जियोथर्मल कुएं की सफलता के आधार पर तैयार किया गया है। पहले कुएं से उबलते तापमान से अ...
‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के बावजूद भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भारत इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है.ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर इस सप्ताह हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. इस टर्मिनल का संचालन भारत द्वारा किया जाता है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे उनके नए सैन्य अभियान के तहत इस सप्ताह चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया था. चाबहा...
मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा

मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा

आर्थिक, राष्ट्रीय
मुम्बई। मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) (Reliance Industries Limited - RIL) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का मुनाफा (Profit) सालाना आधार पर 22 प्रतिशत घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि पिछले साल की समान तिमाही में एशियन पेंट्स की हिस्सेदारी बेचने से उसे एकबारगी बड़ा लाभ हुआ था, जिससे उसका मुनाफा 26,994 करोड़ रुपये रहा था। इस वजह से इस बार लाभ में गिरावट दिख रही है। रिलायंस ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में पिछले साल जैसा 8,924 करोड़ रुपये का असाधारण लाभ नहीं था। हालांकि, अगर इस एकबारगी लाभ को हटा दिए जाए, तो कंपनी का मुख्य कारोबार स्थिर बना रहा। रिलायंस रिटेल के कारोबार का हालरिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने शुक्...
देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। भारत (Inida) में जल्द ही कटे-फटे और गंदे नोटों की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India ) ने देश में पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत फैसला कर लिया है और अगले साल तक 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की तरह कड़े होने के बजाय ये नोट बेहद पतले, हल्के और लचीले होंगे। भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल दस व बीस रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में लाए जाएंगे। इसमें सुरक्षा के उन्हीं उन्नत नियमों का पालन किया जाएगा जो कागज के नोट छापने में अपनाए जाते हैं। अगले साल यह नोट बाजार में आ सकते हैं। रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया है। शुरुआती चरण सफल रहा तो बड़े नोट भी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे...
चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?

चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर आयात निर्भरता घटाने के लिए 51 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे प्रमुख आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका उत्पादन देश में किया जा सकता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए आयातित वस्तुओं का व्यापक आकलन किया गया। मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने 775 अरब डॉलर का आयात किया। इसमें करीब 398 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाए जा सकते थे। सत्रों के मुताबिक, उत्पादों का चयन आर्थिक मजबूती, आपूर्ति शृंखला और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने को ध्यान में रखकर किया गया है।विनिर्माण के लिए किन उत्पादों की हुई पहचान?विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जिन उत्पादों की पहचान की गई है, उनमें कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग वाले कच्चे माल एवं कलपुर्जे शामिल हैं। इस सू...
त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….

त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन (Festive Season) से ठीक पहले रसोई का बजट (Kitchen Budget) फिर बिगड़ सकता है। घरेलू बाजार (Domestic Market) में पिछले एक माह में गेहूं की कीमतें (Wheat prices) 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है। काले सागर में आपूर्ति के बढ़ते जोखिमों के कारण शिकागो गेहूं वायदा पिछले सत्र में 5 फीसदी उछलने के बाद दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। यूक्रेन के बंदरगाह पर हुए हमलों से गेहूं निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य में प्रतिबंध से रूस का गेहूं निर्यात भी मुश्किल में आ गया है। इन व्यवधानों ने वैश्विक गेहूं बाजारों में एक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है। गेहूं की वैश्विक कीमतों में आए इस उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी हुआ है। इस दौरान इंदौर मंडी में गेहूं के दाम सबसे अधिक 8.44 फीसदी त...
SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान

SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की मेगा रॉकेट स्टारशिप (Mega Rocket Starship) गुरुवार को अपने 13वें परीक्षण मिशन के लिए उड़ान भरने से महज एक सेकंड पहले ही रुक गई। लॉन्च से ठीक पहले कुछ इंजनों के सही तरीके से चालू न होने के कारण सिस्टम ने स्वतः लॉन्च को निरस्त कर दिया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड पर ही सुरक्षित रखा गया और ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। आखिर लॉन्च से ठीक पहले क्या गड़बड़ी हुई?स्पेसएक्स ने बताया कि अब यह पता लगाया जाएगा कि आखिर तकनीकी खराबी कहां हुई, उसके बाद ही अगली लॉन्च की तारीख तय की जाएगी। 407 फीट (124 मीटर) ऊंची स्टारशिप 33 मुख्य इंजनों से लैस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह इसका 13वां परीक्षण मिशन था। इंजन स्टार्ट होने के बाद अचानक क्यों रुक गया मिशन?स्पेसएक्स के लाइव वेबकास्ट में देखा गया कि निर्धारित उड़ान...
सिलेंडरों में बची रहने वाली गैस की बर्बादी रोकने का नया मास्टरप्लान…. हर साल होगी ₹21900 करोड़ की बचत

सिलेंडरों में बची रहने वाली गैस की बर्बादी रोकने का नया मास्टरप्लान…. हर साल होगी ₹21900 करोड़ की बचत

आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। देशभर में रोजाना लगभग 40 लाख कमर्शियल सिलेंडरों (40 Lakh Commercial Cylinders) का इस्तेमाल होता है। इनमें से अधिकांश पारंपरिक वाष्प आधारित सिलेंडर (Vapour Of Take) हैं। इन सिलेंडरों की सबसे बड़ी समस्या प्रॉब्लम यह है कि पूरी गैस का इस्तेमाल हो ही नहीं पाता। कुछ न कुछ गैस रह जाती है और लगता है कि सिलेंडर में गैस खत्म हो गई। इसे ऐसे समझें, प्रत्येक 19 किलोग्राम वाले पारंपरिक सिलेंडर में लगभग 1 किलोग्राम गैस रह जाती है, जो बर्बाद हो जाती है। यानी रोजाना करीब 4,000 टन एलपीजी (LPG) का नुकसान हो जाता है। यह सालाना 1.46 मिलियन टन के बराबर है। अब क्या बदल गया हैभारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (Oil Marketing Companies) अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को तरल एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने में जुटी हैं। यह कदम देश में ईंधन की बर्बादी को कम करने और दक्षता बढ़ाने...
यूक्रेन के हमलों से रूस के कई तेल रिफाइनिंग संयंत्र प्रभावित

यूक्रेन के हमलों से रूस के कई तेल रिफाइनिंग संयंत्र प्रभावित

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
मॉस्को/नई दिल्ली। यूक्रेन के लगातार हमलों से रूस के कई तेल रिफाइनिंग संयंत्र प्रभावित होने के बाद वहां पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच खबर है कि रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों ने भारतीय रिफाइनरों से अतिरिक्त पेट्रोल की आपूर्ति की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। सूत्रों के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत से पेट्रोल की कम से कम एक खेप रूस के लिए रवाना भी हो चुकी है, जबकि भविष्य में और आपूर्ति की संभावना जताई जा रही है। रिफाइनिंग क्षमता पर हमलों का असर रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों से रूस की रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है और ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से ईंधन जुटाने की कोशिश कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि नए हमले नहीं होते हैं, तब भी रूस की प्रभावित रिफाइनिंग क्षमता का एक बड़...