नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर आयात निर्भरता घटाने के लिए 51 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे प्रमुख आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका उत्पादन देश में किया जा सकता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए आयातित वस्तुओं का व्यापक आकलन किया गया।
मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने 775 अरब डॉलर का आयात किया। इसमें करीब 398 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाए जा सकते थे। सत्रों के मुताबिक, उत्पादों का चयन आर्थिक मजबूती, आपूर्ति शृंखला और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने को ध्यान में रखकर किया गया है।
विनिर्माण के लिए किन उत्पादों की हुई पहचान?
विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जिन उत्पादों की पहचान की गई है, उनमें कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग वाले कच्चे माल एवं कलपुर्जे शामिल हैं। इस सूची में शामिल करीब 100 उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई होगी। इनका घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये विनिर्माण क्षमता विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है।
सिरदर्द बन रहा चीन से होने वाला आयात?
भारत का 2025-26 में चीन से आयात 132 अरब डॉलर था। यह अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक है। इसमें फैक्टरियों के लिए जरूरी इनपुट और मशीनरी भी शामिल हैं। सरकार ने पाया, पिछले साल आयातित 48.3 करोड़ डॉलर के जूतों का सोल भारत में बनने में दो हफ्ते लगते हैं, जबकि चीन में तीन से पांच दिन लगते हैं।
केंद्र का मकसद ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और इटली की फर्मों संग संयुक्त उद्यम बनाकर इस अंतर को पाटना है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं। चीनी सोलर फोटोवोल्टिक सेल घरेलू निर्माताओं पर भारी पड़ रहे हैं।
