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‘चीन ने चुराया 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा’, ट्रंप का बड़ा दावा; FBI-CIA से जांच की मांग

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए चुनावी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का संवेदनशील डेटा हासिल कर लिया है। ट्रंप के मुताबिक, यह मामला अमेरिकी चुनावी व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है और इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि इस कथित डेटा चोरी में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक प्राथमिकताओं समेत कई संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। उनका दावा था कि इस तरह का डेटा चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और अन्य गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

‘मामले को दबाने की कोशिश हुई’

ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारियों और तथाकथित “डीप स्टेट” से जुड़े लोगों ने चीन से जुड़े इस मामले को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली लंबे समय से साइबर खतरों का सामना कर रही है और मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

FBI, CIA और न्याय विभाग को दिए निर्देश

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ), संघीय जांच एजेंसी (FBI) और केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) से इस मामले की जांच करने तथा यदि कोई जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने को कहा है।

पत्रकारों को प्रभावित करने का भी आरोप

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीनी सरकार ने उन अमेरिकी पत्रकारों की पहचान करने की कोशिश की, जिन्होंने राष्ट्रपति के खिलाफ आलोचनात्मक रिपोर्टिंग की थी। उनके अनुसार, चीन ने कथित तौर पर नकारात्मक खबरें प्रकाशित कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रयास किया, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

‘अगला चुनाव प्रभावित करना चाहता है चीन’

ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन चाहता था कि वह अगला चुनाव हार जाएं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के चुनावी ढांचे पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। उनके मुताबिक, रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-राज्य समूह अमेरिकी चुनावी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।

‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की अपील

अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे अपने सांसदों और सीनेटरों से संपर्क कर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग करें। उनका कहना था कि कई राज्यों में मतदान व्यवस्था में गंभीर कमियां हैं और उन्हें दूर करना जरूरी है, ताकि भविष्य के चुनाव सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए जा सकें।

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