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‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के बावजूद भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भारत इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है.
ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर इस सप्ताह हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद चाबहार बंदरगाह के ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. इस टर्मिनल का संचालन भारत द्वारा किया जाता है.

इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे उनके नए सैन्य अभियान के तहत इस सप्ताह चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया था.

चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमलों और प्रतिबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “अमेरिका द्वारा चाबहार बंदरगाह को लेकर एक विशेष छूट दी गई थी, जो कुछ समय पहले (अप्रैल में) समाप्त हो गई है. इसके बाद से हम इस विशेष मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं.”
हमले के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा, “जहां तक इस पर हमले का सवाल है, हमने इस संबंध में कुछ रिपोर्ट देखी हैं, लेकिन हम आपको आश्वस्त कर सकते हैं कि इस टर्मिनल को खुद कोई नुकसान नहीं हुआ है.” इसके साथ ही उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
भारत के लिए क्यों बेहद खास है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह के दो मुख्य टर्मिनल हैं- शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी, जिसमें से भारत शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल का संचालन कर रहा है. यह बंदरगाह भारत और ईरान द्वारा द्विपक्षीय व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विकसित किया जा रहा है. भारत के लिए यह इसलिए गेम-चेंजर है क्योंकि इसके जरिए भारत, पाकिस्तान को बाईपास करके सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाता है.

दोनों देश चाबहार को 7,200 किलोमीटर लंबे महत्वाकांक्षी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अभिन्न हिस्सा बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं, जो भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच माल ढुलाई का एक बड़ा जरिया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के बावजूद भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भारत इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है.

ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर इस सप्ताह हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद चाबहार बंदरगाह के ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. इस टर्मिनल का संचालन भारत द्वारा किया जाता है.

इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे उनके नए सैन्य अभियान के तहत इस सप्ताह चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया था.

चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमलों और प्रतिबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “अमेरिका द्वारा चाबहार बंदरगाह को लेकर एक विशेष छूट दी गई थी, जो कुछ समय पहले (अप्रैल में) समाप्त हो गई है. इसके बाद से हम इस विशेष मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं.”

हमले के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा, “जहां तक इस पर हमले का सवाल है, हमने इस संबंध में कुछ रिपोर्ट देखी हैं, लेकिन हम आपको आश्वस्त कर सकते हैं कि इस टर्मिनल को खुद कोई नुकसान नहीं हुआ है.” इसके साथ ही उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
भारत के लिए क्यों बेहद खास है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह के दो मुख्य टर्मिनल हैं- शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी, जिसमें से भारत शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल का संचालन कर रहा है. यह बंदरगाह भारत और ईरान द्वारा द्विपक्षीय व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विकसित किया जा रहा है. भारत के लिए यह इसलिए गेम-चेंजर है क्योंकि इसके जरिए भारत, पाकिस्तान को बाईपास करके सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाता है.

दोनों देश चाबहार को 7,200 किलोमीटर लंबे महत्वाकांक्षी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अभिन्न हिस्सा बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं, जो भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच माल ढुलाई का एक बड़ा जरिया है.

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