Saturday, July 18खबर जो असर करे |
Shadow

J&K: सुरक्षा बलों ने LoC पर घुसपैठ की कोशिश को किया नाकाम… आतंकियों को खदेड़ा

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के राजौरी जिले (Rajouri district) में नियंत्रण रेखा (LoC) पर शनिवार को सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए घुसपैठ (Infiltration) की एक संभावित कोशिश को नाकाम कर दिया। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीमा पर तैनात सेना के जवानों ने एक संदिग्ध गतिविधि देखने के बाद फायरिंग शुरू कर दी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह घटना शुक्रवार रात करीब 10 बजे राजौरी के तारकुंडी फॉरवर्ड एरिया में हुई।


सीमा की रखवाली कर रहे सतर्क जवानों ने कुछ संदिग्ध आतंकवादियों को भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते देखा, जिसके बाद सैनिकों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए छोटे हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी। भारतीय सेना की इस कार्रवाई के बाद सीमा पार पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी फायरिंग की गई। दोनों तरफ से यह गोलाबारी करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुक कर चलती रही। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी घटना में भारतीय पक्ष की ओर से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।


इलाके में हाई अलर्ट, तलाशी अभियान शुरू
शनिवार सुबह होते ही सेना ने पूरे तारकुंडी और उसके आस-पास के इलाकों की घेराबंदी कर एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रात के अंधेरे और गोलीबारी का फायदा उठाकर कोई घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र में छिपने में कामयाब तो नहीं रहा। फिलहाल पूरे इलाके को कड़े पहरे में रखा गया है और आधुनिक उपकरणों के जरिए निगरानी को काफी बढ़ा दिया गया है।


भारत-पाक सीमा के पास अवैध मस्जिद और मदरसे हटाए गए
आपको बता दें कि जैसलमेर जिला प्रशासन ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सरकारी जमीन पर बनी छह कथित अवैध मस्जिदों और मदरसों की इमारतों को अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत हटा दिया। यह कार्रवाई बीते गुरुवार को प्रशासन के ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत नाचना, तनोट और शाहगढ़ इलाकों में की गई। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान मीरपुर, हिंदोलों की ढाणी, अहमदपुरा और धानाना जैसे गांवों में चलाया गया। राजस्व, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी का इस्तेमाल कर इन ढांचों को हटा दिया गया।


प्रशासन के अनुसार, जिन निर्माण या ढांचों को ढहाया गया वे सरकारी जमीन पर बनाए गए थे, जिसमें पोंग बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के लिए आरक्षित जमीन भी शामिल है। इसने कहा कि जिन गांवों या ढाणियों में अभियान चला गया वे अंतरराष्ट्रीय सीमा के लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘ऑपरेशन’ के दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की भारी तैनाती रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *