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हिंदू होने का मर्म है विविधता में एकता और आत्मभूतेषु भाव

हिंदू होने का मर्म है विविधता में एकता और आत्मभूतेषु भाव

लेख
By: -------------- भारत एक देश होने के साथ ही एक चेतना है, एक संस्कार है, एक जीवन दृष्टि है। यह वह भूमि है जहां हजारों वर्षों से मानवता को जीने की कला सिखाई गई, जहां विविधता को शक्ति के रूप में देखा गया और जहां अंत:चेतना को ही एकता के लिए समाज की आधारशिला बनाया गया। इसी भारत के स्‍व को स्वर देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज जो कहा है, वह हम सभी के लिए गहन रूप से विचारणीय है। वस्‍तुत: ये भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला वैचारिक उद्घोष है। जिसमें कि उनके शब्द हर हिंदू, हर सनातनी और हर भारतवासी के भीतर यह भाव जगाते हैं कि इस राष्ट्र का चरित्र हमारे आचरण से बनता है और इसकी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। डॉ. भागवत का यह कथन है कि भारत एक भौगोलिक इकाई से ऊपर एक चरित्र है, जोकि भारतीय सभ्यता के मूल स्वभाव को रेखांकित करता है। भारत की पहचान उसकी ...
नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंः डॉ. भागवत

नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंः डॉ. भागवत

राष्ट्रीय
नागपुर, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि, मतदान के दौरान सभी उम्मीदवारों को नकारने (नोटा) के बजाय उपलब्ध विकल्पों में से योग्य उम्मीदवार का चयन करना अधिक उचित है। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है। डॉ. मोहन भागवत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य ‘भैय्याजी’ जोशी ने गुरुवार को महाल स्थित नागपुर नाइट हाईस्कूल के मतदान केंद्र पर मतदान किया। मतदान के लिए पहुंचने वालों में ये दोनों सबसे पहले थे। मतदान के बाद डॉ. भागवत ने कहा कि ‘नोटा’ का प्रयोग सभी उम्मीदवारों को नकारने के समान है और यह लोकतंत्र की सबसे खराब स्थिति मानी जा सकती है। इससे वास्तव में अवांछित उम्मीदवारों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। इसलिए उपलब्ध उम्मीदवारों में से योग्य और सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार का चयन क...